ग्वालियर। भारतीय जनता पार्टी की नई प्रदेश कार्यसमिति के गठन ने एक बार फिर प्रदेश संगठन के भीतर शक्ति संतुलन और राजनीतिक प्रभाव का स्पष्ट संकेत दे दिया है। 106 सदस्यीय प्रदेश कार्यसमिति में ग्वालियर-चंबल अंचल को करीब 20 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिलने के साथ ही केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का बढ़ता राजनीतिक प्रभाव भी खुलकर सामने आया है।नई कार्यसमिति में ग्वालियर-चंबल संभाग के 21 नेताओं को स्थान दिया गया है, जो न केवल क्षेत्रीय संतुलन का संकेत है, बल्कि सिंधिया समर्थक नेताओं की मजबूत मौजूदगी का भी प्रमाण माना जा रहा है। खास बात यह है कि संगठन में लंबे समय से उपेक्षित माने जा रहे कई नेताओं की वापसी भी इसी सूची के माध्यम से हुई है।
प्रदेश भाजपा की राजनीति में लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि संगठनात्मक संरचना में सिंधिया को वह महत्व नहीं मिल रहा, जिसकी अपेक्षा उनके समर्थक करते हैं। कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद जारी अधिकांश सूचियों में उनका नाम पीछे दिखाई देता था, लेकिन इस बार प्रदेश कार्यसमिति की सूची में उनका नाम चौथे स्थान पर रखा गया है। राजनीतिक जानकार इसे महज औपचारिक बदलाव नहीं, बल्कि संगठन की ओर से दिया गया एक स्पष्ट संदेश मान रहे हैं।
कार्यसमिति में पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा, इमरती देवी, ओपीएस भदौरिया, माया सिंह, गिर्राज दंडोतिया समेत सिंधिया खेमे से जुड़े कई नेताओं को जिम्मेदारी मिली है। वहीं तुलसीराम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत जैसे नेताओं को भी संगठन में स्थान देकर सिंधिया समर्थक समूह को मजबूत प्रतिनिधित्व दिया गया है। माना जा रहा है कि कुल आठ प्रमुख समर्थकों को कार्यसमिति में शामिल कर भाजपा नेतृत्व ने सिंधिया को साधने की रणनीति पर काम किया है।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में अपेक्षित भागीदारी नहीं मिलने से सिंधिया पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। ऐसे में कुछ समय पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और सिंधिया के बीच हुई एकांत चर्चा को काफी महत्वपूर्ण माना गया था। अब कार्यसमिति की सूची सामने आने के बाद उस मुलाकात के राजनीतिक परिणाम स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं।
नई कार्यसमिति ने यह संदेश भी दिया है कि भाजपा आगामी चुनावी रणनीति में ग्वालियर-चंबल अंचल की भूमिका को बेहद अहम मान रही है। संगठन ने एक ओर अनुभवी नेताओं को महत्व दिया है, तो दूसरी ओर क्षेत्रीय और गुटीय संतुलन साधने की भी कोशिश की है।
कुल मिलाकर, प्रदेश भाजपा की नई कार्यसमिति केवल संगठनात्मक नियुक्तियों की सूची नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की बदलती राजनीतिक प्राथमिकताओं और शक्ति केंद्रों का भी आईना बनकर सामने आई है। इस पूरी कवायद में सबसे बड़ा राजनीतिक लाभ यदि किसी नेता को मिला है, तो वह ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं, जिनका संगठन के भीतर बढ़ता प्रभाव अब सूची के जरिए साफ तौर पर दिखाई देने लगा है।



















