एनसीपी (SP) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने शुक्रवार (10 जुलाई) को उनकी पार्टी के कांग्रेस में विलय की अटकलों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया है और दोनों दल सहयोगी के रूप में साथ मिलकर काम करते रहेंगे. NCP (SP) और कांग्रेस महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (MVA) और राष्ट्रीय स्तर पर ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दल हैं.
पुणे में सुप्रिया सुले ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘एनसीपी (एसपी) किसी भी विलय की बातचीत में शामिल नहीं है. न तो हमें कांग्रेस की ओर से कोई प्रस्ताव मिला है और न ही हमने विलय को लेकर उन्हें कोई प्रस्ताव दिया है. एनसीपी (एसपी) और कांग्रेस के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध हैं. दोनों दल राजनीतिक मुद्दों पर नियमित रूप से आपसी समन्वय करते हैं.
प्रियंका और राहुल गांधी से अक्सर महाराष्ट्र पर चर्चा करती हूं- सुप्रिया सुले
बारामती से लोकसभा सांसद ने कहा, ”जब भी मैं दिल्ली आती हूं, (कांग्रेस सांसद) प्रियंका गांधी से मिलने का समय लेती हूं और हम महाराष्ट्र के राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक घटनाक्रमों पर चर्चा करते हैं. महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ भी नियमित रूप से चर्चा करती हूं. कई संयुक्त संसदीय समितियों में हम (राकांपा (शप) और कांग्रेस) साथ मिलकर काम कर रहे हैं और विभिन्न मुद्दों पर अक्सर अपना रुख मिलकर तय करते हैं. मैं राहुल गांधी से भी सलाह-मशविरा करती हूं और महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करती हूं.”
‘एनसीपी एसपी और कांग्रेस पहले भी साथ थे, आज भी साथ हैं’
दोनों दलों के बीच घनिष्ठ संबंधों का उल्लेख करते हुए सुले ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी पिछले महीने मुंबई में उनकी बेटी रेवती के उद्योगपति सारंग लखानी के साथ हुए विवाह समारोह में शामिल हुए थे और नवदंपति को आशीर्वाद दिया था. उन्होंने कहा, ”सहयोगी दल के रूप में एनसीपी (एसपी) और कांग्रेस पहले भी साथ थे, आज भी साथ हैं और आगे भी साथ रहेंगे.”
2023 में NCP का हुआ था विभाजन
सुप्रिया सुले के पिता और वरिष्ठ नेता शरद पवार ने 1999 में कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की सह-स्थापना की थी. जुलाई 2023 में पार्टी में विभाजन हो गया, जब तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ शिवसेना-भाजपा गठबंधन के साथ शामिल हो गए. अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट को पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न मिला, जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाला गुट राकांपा (शप) के नाम से जाना जाने लगा.
पिछले सप्ताह मीडिया से बातचीत में कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कांग्रेस से अलग होकर बने क्षेत्रीय दलों के प्रमुखों से मूल पार्टी में वापस लौटने का आग्रह किया था. पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कांग्रेस को वैचारिक प्रतिद्वंद्वियों का नए जोश के साथ मुकाबला करने के लिए मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए यह अपील की थी.



















