कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम 4 मई को आए थे। दो महीने और छह दिन के अंदर ममता बनर्जी एक साथ कई मोर्चे पर संघर्ष कर री हैं। पार्टी में बगागत और टूट के साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने टीएमसी के बैंक अकाउंट्स फ्रीज कर दिए हैं। टीएमसी के तीन बैंक खातों में 440 करोड़ रुपये जमा हैं, लेकिन ममता बनर्जी पुलिस के बाद ईडी की कार्रवाई के बाद अपने तरीके से इस फंड का खर्च नहीं कर पाएंगी। उन्हें हर खर्च के लिए हाईकोर्ट के द्वारा नियुक्ति स्पेशल अफसर की स्वीकृति लेनी लोगी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा है कि नियुक्त विशेष अधिकारी की निगरानी में टीएमसी दैनिक परिचालन और कानूनी खर्चों के लिए पैसों का उपयोग कर सकेगी।
क्यों टीएमसी के बैंक खाते हुए फ्रीज
प्रवर्तन निदेशालयने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत टीएमसी के 3 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया था, जिनमें कुल 440.42 करोड़ रुपये जमा हैं। ईडी के अनुसार, टीएमसी के बैंक खातों से कथित तौर पर एक निजी एविएशन कंपनी (केयरवेल एविएशन) को 160 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। इसी पैसे से खरीदे गए विमान और हेलीकॉप्टर बाद में टीएमसी को ही भारी किराये पर दिए गए, जिसे एजेंसी ने एक संदिग्ध व्यवस्था (सर्कुलर ट्रेडिंग) माना है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी गुट को पार्टी के नियमित दैनिक परिचालन, प्रशासनिक कार्यों और मुकदमों के कानूनी खर्चों के लिए पैसे निकालने की अनुमति दी है, लेकिन यह निकासी अदालत द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी की देखरेख में ही होगी। टीएमसी ने इस पूरी कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना और विपक्षी दलों को परेशान करने की साजिश करार दिया है। पार्टी का दावा है कि उनका सारा फंड चुनाव आयोग और आयकर विभाग के पास पूरी तरह से पारदर्शी और घोषित है।
किस मद में हो पाएगी निकासी?
पुलिस और ईडी द्वारा टीएमसी के अकाउंट्स फ्रीज करने पर ममता बनर्जी के वकील अर्का कुमार नाग ने कहना है कि आज के अंतरिम आदेश में कहा गया है कि एक स्पेशल ऑफिसर (जो हमारी अदालत के पूर्व जज हैं) को नियुक्त किया जाएगा। वे जस्टिस सुब्रत तालुकदार हैं। बैंक अकाउंट्स पर साइन करने वाले लोग क्लीयरेंस के लिए अपने चेक इस स्पेशल ऑफिसर के पास जमा करेंगे। इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कुछ जानकारी और अकाउंट्स की डिटेल हलफनामे के जरिए अदालत में जमा की गई हैं। इन पर विचार किया जाएगा। आदेश में यह भी कहा गया है कि निर्देश जारी करते समय रोजमर्रा के खर्चों जैसे सैलरी और कानूनी खर्च का ध्यान रखा जाए।
टीएमसी दाखिल करेगी पीटिशन
टीएमसी के वकील अर्का कुमार नाग के अनुसार तीनों अकाउंट्स से जुड़े बिधाननगर पुलिस केस के बारे में उन्होंने कहा वह एक अलग मामला है। उन्होंने कहा कि अगर आप ध्यान से देखें, तो ईडी ने बिधाननगर पुलिस केस के आधार पर ही अपना केस दर्ज किया था। इसलिए अगर मुख्य मामले में यह आदेश पारित होता है, तो दूसरे मामले की कार्यवाही से इसमें रुकावट नहीं आनी चाहिए। वे बाधा नहीं बनने चाहिए। साथ ही हम अच्छी तरह जानते हैं कि केंद्र या राज्य सरकारें हमेशा कानून का पालन नहीं करती हैं, इसलिए हमें शायद फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़े और हम ऐसा करेंगे। यह कहा गया है कि हमारे हलफनामे में बताई गई रकम या रोजमर्रा के कामकाज के खर्चों को लेकर कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। नाग ने कहा कि आदेश जारी होने के बाद ही मैं अगली सुनवाई की तारीख बता पाऊंगा। मुझे लगता है कि एक रिपोर्ट मांगी गई है। मैंने अभी आदेश नहीं देखा है, लेकिन जैसे ही वह आएगा, हम जानकारी दे देंगे।



















