श्री पबित्रा मार्गेरिटा

कश्मीरी पश्मीना की नरम गर्माहट से लेकर असम के मूंगा सिल्क की शानदार चमक तक, राजस्थानी बांधनी के जीवंत ज्यामितीय पैटर्न से लेकर कांजीवरम सिल्क की सदाबहार और बेहतरीन बनावट तक, भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता धागों से बुना एक जीता-जागता नक्शा है। आज, सभ्यता की यह बेमिसाल तस्वीर एक ही छत के नीचे एक साथ नज़र आ रही है। नई दिल्ली के प्रसिद्ध भारत मंडपम में 14 से 17 जुलाई तक भारत टेक्स 2026 का आयोजन, हमारे देश की खूबसूरत विविधता को एक ही मंच पर ला रहा है।
वस्त्र उद्योग सिर्फ हमारी विरासत की झलक नहीं है, यह भारत के मैक्रो-इकोनॉमिक ढांचे की एक मज़बूत नींव भी है। यह क्षेत्र लगातार विकास और समानता का एक बहुत बड़ा इंजन बना हुआ है, जो जीडीपी में 2.3%, औद्योगिक उत्पादन में 13% और निर्यात में 8.6% का योगदान देता है। कृषि के बाद भारत में सबसे ज़्यादा रोज़गार देने वाला यह क्षेत्र 100 मिलियन से ज़्यादा लोगों की आजीविका का साधन है, जो ग्रामीण समुदायों को मज़बूत बनाता है और देश भर में लाखों महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाता है।
आर्थिक शक्ति के इस केंद्र को सही मायने में समझने के लिए भारत टेक्स का अनुभव करना बेहद ज़रूरी है। यह वैश्विक स्तर पर प्रमुख भारतीय वस्त्रों का व्यापार मेला है, जिसे पूरी दुनिया के सामने हमारे निर्माण और रचनात्मकता की क्षमता का दबदबा दिखाने के लिए तैयार किया गया है। यह एक ऐसा व्यापक बाज़ार है, जहाँ घरेलू निर्माणकर्ता, राज्यों के पवेलियन, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शक और वैश्विक खरीदार एक ही छत के नीचे होते हैं। इससे बड़े पैमाने पर सोर्सिंग, कॉर्पोरेट जुड़ाव और ब्रांड को प्रदर्शित करने के अवसर भी मिलते हैं।
इस शानदार पहल के सफ़र पर नज़र डालें तो मुझे भारत टेक्स के पिछले दो आयोजनों से बेहद गर्व की अनुभूति का स्मरण होता है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत टेक्स के पिछले संस्करण के दौरान संपूर्ण वस्त्र समुदाय को संबोधित किया था, तो उन्होंने बेहद खूबसूरती से कहा था कि हमने जो बीज बोया था, वह अब तेज़ी से बरगद के पेड़ का रूप ले रहा है। उन्होंने कहा कि यह भव्य आयोजन न केवल हमारी समृद्ध परंपराओं का जश्न मनाता है, बल्कि एक विकसित भारत की अपार संभावनाओं को भी उजागर करता है। पहले दो आयोजनों की ज़बरदस्त सफलता ने एक मज़बूत नींव रखी, बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को आकर्षित किया और सहयोग की दिशा में भी तेज़ी देखने को मिली। भारत टेक्स 2025 के दौरान मेरे व्यक्तिगत अनुभव ने भविष्य के लिए एक बहुत ही सकारात्मक नज़रिया हासिल किया, जहाँ मैंने सरकार से सरकार और व्यापार से सरकार के बीच गहन बातचीत को ठोस नतीजों में बदलते देखा और इसी के चलते भारत की कार्य क्षमता में बढ़ते वैश्विक भरोसे की झलक भी दिखी। यह तीसरा आयोजन उस रफ्तार को और आगे ले जाता है और शुरुआती संभावनाओं को पूरी तरह से औद्योगिक प्रभाव में बदलता है।
इस साल के कार्यक्रम का बहुत बड़ा पैमाना एक सोची-समझी औद्योगिक रणनीति को दर्शाता है। भारत मंडपम में खास प्रदर्शनी हॉलों में फैली यह प्रदर्शनी भारत की पूरी वस्त्र मूल्य श्रृंखला को दिखाती है, जिसमें फाइबर, यार्न, फैब्रिक, कपड़े और फैशन, होम टेक्सटाइल, तकनीकी वस्त्र और सहायक उद्योग शामिल हैं। इसमें 1,600 से ज़्यादा प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं, जो स्थानीय उत्पादन की ताकत को सीधे वैश्विक मंच पर पेश करेंगे। यह प्रधानमंत्री मोदी के क्रांतिकारी 5एफ विज़न- फार्म (खेत) से फाइबर से फैक्ट्री से फैशन से फॉरेन (विदेश) तक के सफर को दर्शाता है। पूरी मूल्य श्रृंखला को एक ही औद्योगिक श्रृंखला में जोड़कर, यह कार्यक्रम विनिर्माण के हर चरण को देश में ही संभालने की भारत की आत्मनिर्भर क्षमता को दिखाता है।
इस पहल को दुनिया भर से ज़बरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। इस संस्करण में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, जापान, पुर्तगाल, स्पेन, न्यूज़ीलैंड, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका और नेपाल समेत 14 देशों के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शक शामिल हैं, साथ ही, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ का भी मज़बूत संस्थागत प्रतिनिधित्व है। कई देशों के मंत्री-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल और बड़े व्यापारिक प्रतिनिधि दीर्घकालीन साझेदारी की संभावना तलाशने के लिए इसमें हिस्सा ले रहे हैं। उम्मीद है कि चार दिनों में 110 से ज़्यादा पंजीकृत देशों से 7,000 से ज़्यादा खरीददार और 1.3 लाख व्यापारिक आगंतुक आएंगे, जो वहां दिखाए जा रहे 20,000 से ज़्यादा वस्त्र उत्पादों को देखेंगे। इस व्यावसायिक गतिविधि में 3,500 से ज़्यादा खास तौर पर आयोजित बिज़नेस टू बिज़नेस बैठकें होंगी। इसके अलावा, राज्य निवेशक संपर्क सत्र भी होंगे, जो अलग-अलग भारतीय राज्यों को अपने खास औद्योगिक ढ़ांचे को पेश करने का मंच प्रदान करेंगे।
उद्योगों को आगे बढ़ाने हेतु वास्तविक नेतृत्व के लिए ज्ञान और भविष्य की योजना के प्रति गहरी प्रतिबद्धता की ज़रूरत होती है। भारत टेक्स 2026 इस ज़िम्मेदारी को वैश्विक वस्त्र वार्ता के ज़रिए निभाता है, जिसमें पैनल चर्चा, राउंडटेबल, मास्टरक्लास, राज्य सत्र, अवॉर्ड्स पिच फेस्ट और कार्यशाला जैसे 100 से ज़्यादा खास सत्र शामिल हैं। 370 से ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय सीएक्सओ, पॉलिसी निर्माता और अन्वेषकों की अगुवाई में होने वाले ये खास सत्र व्यापार और निवेश को बढ़ाने, तकनीक और नवाचारों को आगे बढ़ाने और फैशन तथा क्राफ्ट को बेहतर बनाने पर फोकस करेंगे। इस कार्यक्रम में व्यापार, निवेशक, तकनीक और संस्थागत सहयोग से जुड़े कई रणनीतिक समझौतों और क्षेत्रों से जुड़ी रिपोर्ट पर हस्ताक्षर और उन्हें लॉन्च भी किया जाएगा।
इन चर्चाओं में वहनीयता और सर्कुलैरिटी जैसे अहम पहलुओं पर भी खास ध्यान दिया जाएगा। पिछले कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया था कि वैश्विक फैशन समुदाय तेज़ी से पर्यावरण के लिए फैशन के दृष्टिकोण को अपना रहा है और वहनीयता हमेशा से भारत की टेक्सटाइल विरासत का अहम हिस्सा रही है। भारत टेक्स का यह संस्करण वैश्विक पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों को एक बड़े अवसर में बदलता है और यह दिखाता है कि कैसे नवाचारों की मदद से हमारी पारंपरिक तकनीकें और बेहतर हुई हैं और इस दौरान ये भी ख्याल रखा गया है कि इस प्रक्रिया में संसाधनों का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल हो सके और बर्बादी कम हो, जिससे हमारे बुनकरों और कारीगरों को सीधा फायदा हो। हमारे वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह जी के नेतृत्व में, मंत्रालय ने ज़मीनी स्तर पर इन आधुनिकीकरण और वहनीय वृद्धि की पहलों को तेज़ी से आगे बढ़ाया है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि हमारी पूरी वस्त्र मूल्य श्रृंखला को मज़बूत आधुनिक तकनीक, बड़े पैमाने पर लागू होने वाले नीतिगत फ्रेमवर्क और मज़बूत मार्केट लिंकेज का सहारा मिले।
आज भारत टेक्स में लगातार बढ़ता पैमाना और आत्मविश्वास जो दिख रहा है, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक से लगातार किए जा रहे नीतिगत सुधारों का नतीजा है। पिछले 12 सालों में, मोदी सरकार ने बड़े बदलाव लाने वाले कदमों के ज़रिए वस्त्र मूल्य श्रृंखलाओं की हर कड़ी को मज़बूत किया है। वस्त्रों के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना ने ₹31,687 करोड़ से ज़्यादा के निवेश का वादा हासिल किया है। इससे मैन-मेड फाइबर वाले कपड़ों, फैब्रिक और टेक्निकल टेक्सटाइल के बड़े पैमाने पर निर्माण को बढ़ावा मिला है और साथ ही बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर भी पैदा हुए हैं। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री के दूरदर्शी 5एफ दृष्टिकोण को अपनाते हुए सात पीएम पार्क को एकीकृत विनिर्माण व्यवस्था के तौर पर विकसित किया जा रहा है। ज़मीनी स्तर पर लोगों को सशक्त बनाने का काम भी तेज़ी से चल रहा है, राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम के तहत 794 हैंडलूम क्लस्टर में लगभग ₹2,000 करोड़ का निवेश किया गया है। इससे 1.17 लाख बुनकरों को बेहतर करघे मिले हैं और लगभग 90,000 कामगारों को कौशल प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं, राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम के तहत हस्तशिल्प क्षेत्र में ₹1,335 करोड़ से ज़्यादा का निवेश किया गया है। इसके अलावा, 1.5 लाख से ज़्यादा बुनकरों को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) से जोड़ा गया है और बुनकर मुद्रा योजना के तहत लगभग 3 लाख लोगों को बिना गारंटी के ऋण दिए गए हैं। अपने घरेलू निर्माताओं, कारीगरों और अन्वेषकों को सीधे वैश्विक बाज़ार से जोड़कर, इन व्यापक सुधारों ने हमें उस बड़े वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने के लिए तैयार किया है, जिसकी झलक इस हफ्ते देखने को मिल रही है।
आज जब हम भारत मंडपम के जीवंत प्रदर्शनी हॉलों पर नज़र डालते हैं, तो हमारा नज़रिया इस व्यापार प्रदर्शनी के तात्कालिक दायरे से कहीं आगे तक विस्तृत होता नज़र आता है। यह आयोजन भारत के वस्त्र उद्योग को 350 बिलियन डॉलर के वैश्विक शक्ति केंद्र में बदलने के हमारे विज़न 2030 रोडमैप में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो विकसित भारत @ 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ पूरी तरह से मेल खाता है। मैं आप सभी को भारत टेक्स 2026 में अगले चार दिनों तक हमारे साथ जुड़ने के लिए आमंत्रित करता हूं, ताकि आप हमारे श्रमिकों की अविश्वसनीय शक्ति, हमारे रचनाकारों के शानदार नवाचारों और वैश्विक वस्त्रों के भविष्य को देख सकें, जिन्हें गर्व से भारत में डिज़ाइन किया गया है, टिकाऊ तरीके से निर्मित किया गया है और बड़े पैमाने पर एकीकृत किया गया है।

        *(लेखक केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री हैं। व्यक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं।)*
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