पंजाब कभी स्वतंत्रता संग्राम और बौद्धिक उत्कृष्टता में पूरे भारत का नेतृत्व करता था, भारतवर्ष के स्वातंत्रय संग्राम के तीन महापुरुष थे-लाल, बाल और पाल। पंजाब के लाला लाजपत राय, महाराष्ट्र के बालगंगाधर तिलक और बंगाल के बिपिन चन्द्र पाल। तीनों कट्टर सनातनी थे और उनके अनुयायी सर्वसमाज में थे। पंजाब ने क्रांतिकारियों की प्रसिद्ध तिकड़ी प्रदान की-भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव। किसी ने उनको सिख-हिन्दू में बांट कर नहीं देखा, तब शब्द भी केशधारी और मोने चलते थे। पंजाब देश के साहित्य, संगीत, कला, भारत भक्ति का सर्वोच्च केंद्र था। लाला लाजपत राय से लाला जगतनारायण तक, पंजाब ने अनेक महापुरुषों को जन्मा, उनका वंदन किया।स्वामी रामतीर्थ पंजाब से थे, स्वामी श्रद्धानन्द जी पंजाब से थे, महॢष दयानन्द का सर्वाधिक प्रचार पंजाब में हुआ, पूरा बॉलीवुड एक समय पंजाबी था-पृथ्वीराज कपूर से लेकर पूरा कपूर खानदान, देवानंद, दिलीप कुमार, सिमी, अनेक निर्देशक और अभिनेत्रियां। पृथ्वीराज कपूर की हर फिल्म भगवान शिव को जल चढ़ाते हुए शुरू होती थी। हरिमंदिर साहब में बाबा श्रीचंद जी की धूनी साहब की अलख जलती रहती थी, वहां राम, कृष्ण, दुर्गा की प्रतिमाएं थीं। यह सब अभी कल की ही बात है।फिर ब्रिटिश दुरभिसंधि और पाकिस्तान की आई.एस.आई. के खिलौने खालिस्तानियों का ऐसा समय आया कि अटल बिहारी वाजपायी को कहना पड़ा-दूध में दरार पड़ गई। जैसे हम सभी गुरु साहिबानों के अमर साहिबजादों के बारे में पढ़ते हैं, हम हमेशा सच्चे गुरु नानक देव जी के दोनों सुपुत्रों के बारे में पढ़ते थे-एक बाबा लख्मीचंद जी, दूसरे बाबा श्रीचंद जी। लख्मीचंद जी व्यापारी हो गए, श्रीचंद जी शिव जी के अवतार बैरागी अवधूत साधु हो गए, जिनकी आज भी घर-घर में पूजा होती है। पंजाब में अब कौन पढ़ता है इनके बारे में। लाला लाजपत राय पंजाब केसरी थे, हिन्दू महासभा और आर्य समाज के बड़े नेता थे, हिन्दू-मुस्लिम एकता के पक्षधर थे, पूरे अविभाजित पंजाब के एकमात्र सर्वमान्य नेता थे, उनको किसी ने हिन्दू केसरी या हिन्दू नेता नहीं कहा। पंजाब के नेताओं में मेहरचंद महाजन, डा. गोकुल चंद, डा. बलदेव प्रकाश, बलरामजी दास टंडन, यज्ञदत्त शर्मा, लाला जगत नारायण पूरे पंजाब की आवाज थे, पूरा पंजाब उनको मानता था।पंजाब के सभी राजघराने गुरुओं के भक्त और दुर्गा के सेवक थे, खासकर पटियाला राजघराना। माता रानी के दरबार में सब माथा टेकते रहे हैं।यह सब कब टूटा, कैसे टूटा और पंजाब कब सिंगर, डांसर, चिट्टे का इलाका, जहां के गांव-गांव में कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जाने के लिए बेताब युवाओं के लिए सैंटर खुल गए हैं, यह सबको पता है। पंजाब को उसकी जड़ों से काटकर एस.जी.पी.सी. में सहजधारियों को वोट डालने के अधिकार से वंचित किया जाना, आनंद कारज एक्ट बनवाना, इस सबके बाद यहां तक कि श्मशान घाट तक अलग करवाने के प्रयास शुरू हुए, जो बुद्धिमान बुजुर्गों की वजह से रुके। पंजाब बचाने वाली महान विभूतियों में सरदार बेअंत सिंह और के.पी.एस. गिल के नाम को जो छोड़ता है, वह पंजाब के साथ विश्वासघात करता है। सरकार से आग्रह है कि लाला जगत नारायण और पंजाब केसरी समूह के शानदार देशभक्तिपूर्ण इतिहास को देखते हुए उनको भारत रत्न से सम्मानित किया जाए, जिन्होंने अपने पिता, भाई को देश पर वार दिया। वे दिन, जब बसों से उतार-उतार कर हिन्दुओं को गोली मारी जाती थी, सिख घरों पर खालिस्तानियों के जबरन कब्जे और मां-बेटियों से अत्याचार, गुरुद्वारों में खालिस्तानी अलगाववादी दहशतगर्दों की बेअदबी, स्कूल अध्यापकों और छात्रों को गोली मारना, यह सब पंजाब का पुराना इतिहास नहीं, अभी का है, जिसको भूलना वतन के साथ विश्वासघात होगा।पंजाब के नेताओं को खालिस्तानी अंधेरगर्दी के समय बलिदान हुए सभी पंजाबियों की याद में अमृतसर, जालंधर, चंडीगढ़ में एक विराट शांति स्मारक बनाकर उनको श्रद्धांजलि अॢपत करनी चाहिए, जो अपने रक्त संबंधियों को भूल जाए, जो अपनेघाव भूल जाए, जो पंजाब बचाने की सांझी लड़ाई और शहादत भूल जाए उसको भगवान भी नहीं बचा सकता। देश और समाज कायर, डरपोक, निर्णयहीन सत्तापिपासुओं से नहीं बचता। पंजाब भूल गया कि भगत सिंह बनने के लिए भारत को प्रथम आराध्य मानना होता है, क्रांतिकारी भारत के लिए बलिदान हुए थे, न कि किसी मजहब के लिए। पंजाब भूल गया कि डर और भय के कारण जलियांवाला बाग में गोली चलाने वाले ङ्क्षहदुस्तानी थे, पंजाब भूल गया कि देश और धर्म के लिए गुरुओं की शहादत का अपमान करने वाले आई.एस.आई. के एजैंट खालिस्तानी तत्वों ने पंजाब को सबसे ज्यादा लहूलुहान किया, सिख बेटियों की इज्जत लूटी, विदेशी देशद्रोहियों का साथ दिया। जिन लोगों ने जान पर खेल कर पंजाब बचाया उनमें पंजाब पुलिस और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक हैं। पंजाब पुलिस ने जान भी दी और गालियां भी खाईं। उसको राक्षस दिखने वाली फिल्में बनाते हैं। तो वे अपनी सुरक्षा से पंजाब पुलिस क्यों नहीं हटा देते? मेरा सुझाव है कि पंजाब पुलिस द्वारा आतंकवादियों के विरुद्ध लड़े युद्ध के सम्मानार्थउनके एक जत्थे को गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल करना चाहिए।-तरुण विजय
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