17 मई, 1961 को कनाडाई संसद को संबोधित करते हुए अमरीका के 35वें राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने ये ऐतिहासिक शब्द कहे थे, ‘‘भूगोल ने हमें पड़ोसी बनाया है, इतिहास ने हमें मित्र बनाया है, अर्थव्यवस्था ने हमें सांझेदार बनाया है और आवश्यकता ने हमें सहयोगी बनाया है।’’ ये शब्द आज भी कनाडा की राजधानी ओटावा में अमरीकी दूतावास के बाहर एक पत्थर की शिला पर उकेरे हुए हैं। अमरीका के 40वें राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने चेतावनी दी थी कि संरक्षणवाद और व्यापारिक बाधाएं, अपने करीबी मित्रों पर टैरिफ थोपना वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक मजबूती के लिए नुकसानदेह साबित होंगे। 1988 में उन्होंने ही कनाडा के साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री ब्रायन मुलरोनी से विचार-विमर्श करके मुक्त व्यापार समझौता (एफ.टी.ए.) किया था। इस प्रकार पूरे विश्व में सबसे बड़ा मुक्त व्यापार क्षेत्र स्थापित किया गया था।

वर्तमान दौर में अमरीका और कनाडा के रिश्ते आपसी व्यापार को लेकर इतने बिगड़ गए हैं कि दोनों देश दुश्मनों की तरह बातचीत की मेज से उठ खड़े हुए। व्यापारिक समझौते के बिल्कुल अंत में जब लिखित रूप में अमरीका ने कनाडा को रूस द्वारा बेलारूस की तरह हमेशा के लिए अपनी कठपुतली बनाने जैसी अस्वीकार्य शर्तें थोप दीं, तो कनाडा के महान अर्थशास्त्री और दूरदर्शी प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अपना व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल वापस बुला लिया और घोषणा की कि जब कोई हमला करे तो समझो आप युद्ध के मैदान में हो। ये शब्द 10वें महान सिख गुरु गोबिंद सिंह जी के इन शब्दों की तरह चुनौतीपूर्ण हैं-‘जबै बाण लाग्यो। तबै रोस जाग्यो।’ प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि कनाडा अपनी संप्रभुता और प्रमुख कंपनियों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं कर सकता।

योगदान : कनाडा वह देश है जिसने अमरीका के अत्यंत करीबी मित्र के रूप में विश्व भर में उसके युद्धों में कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाइयां लड़ीं और अपने सैनिकों का खून उसके लिए बहाया। वियतनाम के साथ अमरीकी युद्ध में 30,000 कनाडाई स्वयंसेवकों ने भाग लिया। कोरिया, ईराक और अफगानिस्तान युद्धों में बड़ा योगदान दिया।

विश्वासघात : अच्छे मित्रों और सहयोगियों की तरह दोनों देशों के बीच आपसी संधियां नेकनीयती, विश्वास और सद्भावना पर आधारित मधुर संबंध कायम रखे हुए थीं। लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने पहले 45वें राष्ट्रपति कार्यकाल में कनाडा के साथ वर्ष 1988 की एफ.टी.ए. और 1994 की नाफ्टा संधि को तोड़कर कनाडा और मैक्सिको के साथ ‘कुस्मा’ व्यापारिक संधि की।
47वें राष्ट्रपति के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल के लिए 20 जनवरी, 2025 को शपथ लेने के तुरंत बाद ही उन्होंने कनाडा को अमरीका का 51वां राज्य बनाने, मैक्सिको की खाड़ी को अमरीकी खाड़ी में बदलने, पनामा नहर, गाजा और ग्रीनलैंड आदि पर कब्जा करने की डींगें हांकनी शुरू कर दीं। क्रोनी पूंजीपतियों के साथ मिलकर पूरे विश्व व्यापार पर कब्जा जमाने के लिए ‘टैरिफ’ थोपना शुरू कर दिया। कमजोर देशों को तो वह धमकाकर घुटनों पर ला देते हैं लेकिन जब चीन जैसा ताकतवर देश सामने से आंखें दिखाता है तो पीछे हट जाते हैं। भारत को भी उन्होंने धमकाने और भारी दरों पर टैरिफ थोपने की बार-बार धमकियां दीं।
त्रिपक्षीय कुस्मा संधि पर अभी पुनॢवचार होना बाकी है कि अमरीका ने कनाडा की अर्थव्यवस्था और संप्रभुता को अपने अधीन करने के लिए शत्रुतापूर्ण विनाशकारी कदम उठाए। समझौता बिल्कुल अंतिम चरण में पहुंचने पर अमरीकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने लिखित

रूप में नई शर्तें और धाराएं इसमें शामिल कर दीं : 1. कनाडा को अन्य देशों के साथ व्यापारिक संधियों तक सीमित रखना ताकि वह उसका गुलाम और कठपुतली बना रहे। 
2. वर्ष 1930 के अमरीकी स्मूट-हॉले एक्ट की धारा 338 के तहत कनाडा पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की। 
3. कनाडा नैटफ्लिक्स, अमेजन और अन्य प्राइम वीडियो, फिल्मों तथा अन्य सामग्री को टी.वी. और संगीत के माध्यम से बढ़ावा दे। 
4. कनाडा को हर व्यावसायिक वस्तु पर फ्रैंच भाषा का इस्तेमाल बंद करने के लिए कहा गया। कनाडा के संविधान के अनुसार फ्रैंच देश की दूसरी आधिकारिक भाषा है।
कनाडा ने ऐसी गुलामी भरी शर्तें मानने से इंकार कर दिया। अमरीका द्वारा कनाडा से निर्यात होने वाली वस्तुओं पर 20 बिलियन डॉलर का 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ईंट का जवाब पत्थर से देते हुए कनाडा ने अमरीका से आयात होने वाली 700 वस्तुओं पर 27.5 बिलियन डॉलर का 15 से 50 प्रतिशत टैरिफ थोप दिया, जो 18 सितम्बर से लागू हो जाएगा। 

एकजुटता : कनाडा के 10 प्रांत और 3 केंद्र शासित प्रदेश प्रधानमंत्री कार्नी के नेतृत्व में पूरी तरह एकजुट हैं। कुछ प्रांतों में अमरीकी शराब और अन्य वस्तुओं को दुकानों से बाहर निकाल दिया गया था। कनाडाई लोगों को ज्ञात है कि इस टकराव के कारण व्यापार, अर्थव्यवस्था और उद्योग पर बुरा असर पडऩे वाला है, हजारों नौकरियां छिनने वाली हैं। लेकिन मुख्य प्रश्न देश की संप्रभुता और स्वतंत्रता को बनाए रखने का है। 

अमरीकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने कनाडा को अपने अधीन रखने के लिए सैन्य हमले की धमकी दी है, लेकिन अमरीका यह नहीं जानता कि शांत स्वभाव वाले कनाडाई युद्ध के मैदान में चट्टान की तरह डटकर मुंहतोड़ जवाब देने का साहस रखते हैं। वे राष्ट्रपति ट्रम्प की ओंटारियो झील को अमरीकी झील में बदलने की खोखली धमकियों की परवाह नहीं करते। कौन नहीं जानता कि ईरान से शर्मनाक शिकस्त खाकर राष्ट्रपति ट्रम्प मुंह छिपाते फिर रहे हैं। मूर्खतापूर्ण टैरिफ के कारण हर अमरीकी परिवार पर 2000 डॉलर, जबकि मिशिगन जैसे राज्य में 3200 डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। महंगाई और बेरोजगारी के कारण 50 राज्यों में 18 महीनों में 2 बार ट्रम्प के खिलाफ प्रदर्शन हो चुके हैं। हर शीशा टूट जाता है पत्थर की चोट से, पत्थर ही टूट जाए वो शीशा तलाश कर।-दरबारा सिंह काहलों   

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