राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, कलेक्टर, पुलिस अधिक्षक को शिकायत कि प्रति सौपी गई
रायपुर । राजस्व अभिलेखों में कथित हेरफेर, खसरा नंबरों में अवैध परिवर्तन, नामांतरण एवं बंटांकन में गंभीर अनियमितताओं को लेकर शिकायतकर्ता पुष्पेंद्र सिंह ने पूरे प्रकरण की से स्वतंत्र जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में शिकायतकर्ता पुष्पेंद्र सिंह ने प्रकरण के संबंध में समस्त दस्तावेज प्रस्तुत कर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, कलेक्टर, अपर कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक कोंडागंाव से इस षडयंत्र में शामिल दोषी आरोपियों के खिलाफ न्यायिक जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
इस बीच शिकायतकर्ता पुष्पेंद्र सिंह के मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने पुलिस अधीक्षक को दोषी पक्ष के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद संबंधित थाना में प्रकरण दर्ज कर जांच प्रारंभ की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच के दौरान थाना स्तर से जानकारी मिली कि शिकायत में नामित आरोपी पक्ष फरार है और उनके मोबाइल फोन भी बंद हैं, जिससे जांच प्रभावित हो रही है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि इस प्रकरण की शिकायत में नामित कांतेज देवांगन, जो उस समय कलेक्टरेट में पदस्थ कर्मचारी थे, तथा उग्रेज देवांगन, जो कृषि विभाग के एस.डी.ओ कार्यालय से संबद्ध बताए गए हैं, ने आपसी मिलीभगत से राजस्व अभिलेखों में कथित अनियमितताओं को अंजाम देने में भूमिका निभाई। पुष्पेंद्र सिंह ने इन आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि संबंधित पक्ष ने एस.डी.एम न्यायालय से स्टे आदेश प्राप्त किया, जबकि उनके अनुसार भूमि स्वामित्व के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने प्रश्न उठाया है कि भूमि संबंधी मामलों में अभिलेखों और दस्तावेजों का परीक्षण आवश्यक प्रक्रिया का हिस्सा होता हंै, फिर बिना दूसरे पक्ष को अवसर दिए किन आधारों पर यह स्टे आदेश जारी किया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार यह प्रकरण वर्तमान में जिला न्यायालय, कोंडागांव में विचाराधीन है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे प्रकरण में राजस्व विभाग के डिजिटल रिकॉर्ड, ऑडिट ट्रेल, लॉग हिस्ट्री और सर्वर डेटा की फॉरेंसिक जांच कर यह पता लगाया जाए कि अभिलेखों में परिवर्तन कब, किसके द्वारा और किस वैधानिक आधार पर किया गया। साथ ही, उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उनके विरुद्ध विधिसम्मत आपराधिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।



















