Famous Shiva Temples Dehradun: देहरादून सिर्फ खूबसूरत वादियों के लिए ही नहीं, बल्कि प्राचीन शिव मंदिरों और पौराणिक मान्यताओं के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां कई ऐसे मंदिर मौजूद हैं जिनका संबंध महाभारत काल और भगवान शिव की आस्था से जुड़ा हुआ माना जाता है. टपकेश्वर महादेव, लाखामंडल, पृथ्वीनाथ महादेव और रुद्रेश्वर महादेव जैसे मंदिरों में सावन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.
देहरादून शहर से करीब 6 किलोमीटर दूर गढ़ी कैंट क्षेत्र में तमसा नदी के किनारे स्थित टपकेश्वर महादेव मंदिर एक प्रसिद्ध और प्राचीन शिवधाम है. इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य ने यहां तपस्या की थी, इसलिए इसे द्रोण गुफा के नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है कि यहीं पर उनके पुत्र अश्वत्थामा का जन्म हुआ था. पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब अश्वत्थामा ने अपनी माता से दूध मांगा और उन्हें दूध नहीं मिला, तो उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी.

मान्यता है कि अश्वत्थामा की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने गुफा में मौजूद प्राकृतिक शिवलिंग पर दूध की धारा प्रवाहित की थी. समय के साथ यह धारा जल की बूंदों के रूप में बदल गई, जो आज भी शिवलिंग पर लगातार टपकती रहती है. सावन के महीने में यहां हर सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.
देहरादून जिले के जौनसार-बावर क्षेत्र में स्थित लाखामंडल एक बेहद प्राचीन और ऐतिहासिक शिव मंदिर है. धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ यह स्थान पुरातात्विक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि महाभारत काल में कौरवों ने पांडवों को जलाने के लिए जिस लाक्षागृह का निर्माण कराया था, वह स्थान यही था. यहां हुई खुदाई के दौरान कई प्राचीन मूर्तियां और बड़ी संख्या में शिवलिंग मिले हैं, जो इस स्थान के पुराने इतिहास को दर्शाते हैं.
लाखामंडल मंदिर परिसर में दो विशाल शिवलिंग भी स्थापित हैं, जिनको लेकर कई धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. कहा जाता है कि इनमें से एक शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद उसमें चमक दिखाई देती है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है. सावन के दौरान इस जगह पर शिवभक्ति के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता का भी अद्भुत नजारा देखने को मिलता है.
देहरादून के सहारनपुर चौक के पास स्थित पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर शहर के सबसे पुराने और आस्था के प्रमुख केंद्रों में से एक है. मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है. धार्मिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान इस स्थान पर आए थे और उन्होंने यहां भगवान शिव की आराधना की थी. मंदिर का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव कराता है.
इस मंदिर में सालभर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन सावन और महाशिवरात्रि के समय यहां विशेष रौनक देखने को मिलती है. सावन में सुबह से ही श्रद्धालु जल चढ़ाने के लिए मंदिर पहुंचने लगते हैं. लोगों की मान्यता है कि भगवान शिव के दर्शन और पूजा करने से मन को शांति मिलती है और परेशानियां दूर होती हैं.
देहरादून के रायपुर क्षेत्र में स्थित रुद्रेश्वर महादेव मंदिर भी प्राचीन शिव मंदिरों में शामिल है. मान्यता है कि इस स्थान का संबंध गुरु द्रोणाचार्य और महाभारत काल से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि गुरु द्रोणाचार्य ने यहां पांडवों और कौरवों को शिक्षा दी थी और 11 शिवलिंगों की स्थापना की थी. इन शिवलिंगों को भगवान शिव के 11 स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां जलाभिषेक करने से भगवान शिव की कृपा मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.



















