प्रवासी पक्षियों के पसंदीदा स्थान के रूप में विश्व विख्यात ओडिशा का चिल्का झील अब इरावदी डॉल्फिन के लिए सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर उभरा है। भारत के पूर्वी तट पर स्थित सबसे बड़े लगून में चिल्का विकास प्राधिकरण (सीडीए) द्वारा जैव विविधता को लेकर किए गए वार्षिक सर्वेक्षण में यह जानकारी मिली है। अधिकारी ने बताया कि सर्वेक्षण के मुताबिक वर्ष 2019 में 150 डॉल्फिन के मुकाबले वर्ष 2020 में यह संख्या बढ़कर 156 हो गई है। 
बता दें कि इरावदी डॉल्फिन चिल्का झील की पहचान है। 
सीडीए ने एक बयान में कहा कि इरावदी डॉल्फिन की प्रजाति केवल एशिया में पाई जाती है और चिल्का झील से इंडोनेशिया तक इसकी विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं। इरावदी डॉल्फिन भारत में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम-1972 के तहत संरक्षित है और सीआईटीईएस (परिशिष्ट-1) और आईयूसीएन के तहत लाल सूची (विलुप्ति के संकट से गुजर रही प्रजातियों) में शामिल है। सीडीए के मुख्य कार्यकारी सुशांत नंदा ने बताया कि सीडीए ने राज्य के वन विभाग के साथ मिलकर इरावदी डॉल्फिन के संरक्षण के लिए कदम उठाया है। उन्होंने बताया कि इसके तहत चिल्का झील में उन स्थानों की पहचान की गई जहां पर इन डॉल्फिन का निवास है ताकि उचित प्रबंधन किया जा सके। इनके संरक्षण के लिए इनकी निगरानी की गई, झील में पर्यटन नौकाओं के चालकों को प्रशिक्षित किया गया और उन्हें जागरूक किया गया, मगरमुख धारा को खोला गया ताकि बाहरी जलाश्य से डॉल्फिन आसानी से मुख्य झील में आ सकें। 

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