महासमुंद। ग्राम केशवा में आयोजित की जा रही श्रीमद् भागवत कथा के दौरान मंगलवार को उज्जैन की अंतर्राष्ट्रीय संत देवी वर्षा नागर ने कहा कि भागवत कथा से राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई। समर्पण भाव के साथ भागवत सुनने से मन को शांति तो मिलती है ही साथ ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। मंगलवार को भोलेनाथ की वंदना के साथ तीसरे दिन की भागवत कथा की शुरूआत हुई। संत वर्षा नागर ने तीसरे दिन सुखदेव जी एवं राजा परीक्षित केेे प्रसंग का वर्णन करते हुए भागवत कथा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि प्यास से व्याकुल होकर ऋषि के आश्रम में पहुंचे। ऋषि उस समय समाधि की अवस्था में थे। राजा परीक्षित उनसे जल की याचना करते हैं, परंतु कोई जवाब नहीं मिलने पर एक मरा हुआ सर्प गले में डाल कर लौट जाते हैं। जिस पर ऋषि पुत्र ने राजा परीक्षित को श्राप दे दिया कि यही मरा हुआ सर्प 7 दिन के अंदर राजा को डसेगा और राजा परीक्षित की मृत्यु का कारण बनेगा। राजा परीक्षित को जब अपनी भूल का अहसास होता है तो वह प्रायश्चित करने गंगा के तट पर जाते हैं। जहां सदगुरू सुकदेव भागवत कथा सुनाने के लिए प्रगट हुए। सुकदेव भागवत कथा सुनाने वाले ही थे कि स्वर्ग लोक से देव इंद्र सोने के घड़े में अमृत लेकर पहुंचे और अमृत पीकर अमर होने की बात कही। जिस पर राजा परीक्षित ने यह कहकर अमृत पीने से मना कर दिया कि अमृत से सिर्फ शरीर अमर हो सकता है जबकि कथा से तन-मन अमर होने के साथ ही मोक्ष की प्राप्ति हो सकेगी। सुखदेव जी द्वारा श्रीमद् भागवत कथा सुनाई जाती है और राजा परीक्षित को मुक्ति मिलती है। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।
त्याग जीवन को बनाता है महान
भागवत कथा के तीसरे दिन संत देवी वर्षा नागर ने कहा कि त्याग जीवन को महान बनाता है। जगत में जितने लोगों ने भोग को छोड़कर त्याग को अपनाया वे लोग महान बने। हमारे अंदर त्याग की भावना जन्म लेगी तो असीमित आनंद की अनुभूति होगी। संत वर्षा नागर ने मर्यादा पुरूषोत्तम राम व भरत, राजा हरिशचंद व भक्त प्रहलाद आदि का उदाहरण देते हुए बताया कि इन्होंने त्याग करके मिसाल पेश की है। त्याग से ही व्यक्ति महान बनता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में त्याग अवश्य करना चाहिए।

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