इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कैश कांड में जांच समिति की रिपोर्ट से बड़ा खुलासा हुआ है। लोकसभा अध्यक्ष की ओर से गठित जांच समिति ने उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को सही माना है। रिपोर्ट में उन्हें दोषी करार दिया गया है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस मामले में किसी प्रकार की साजिश के संकेत नहीं मिले हैं।

मामला दिल्ली में जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास से नकदी मिलने और उसके बाद शुरू हुई जांच से जुड़ा है। जांच समिति ने नकदी की मौजूदगी, उससे जुड़े साक्ष्यों के रखरखाव और जस्टिस वर्मा की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

क्या घर के स्टोररूम में मिले थे rs 500 के नोट?
समिति ने अपने निष्कर्ष में जज को दोषी माना है। रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली के 30, तुगलक क्रिसेंट स्थित आधिकारिक आवास के स्टोररूम में पर्याप्त संख्या में rs 500 मूल्यवर्ग के नोट मिले थे। समिति ने कहा कि जज यह संतोषजनक ढंग से स्पष्ट नहीं कर सके कि ये नोट वहां कैसे पहुंचे, उनका स्रोत क्या था और उनका स्वामित्व किसका था? 

क्या नकदी से जुड़े सबूत सुरक्षित नहीं रखे गए?
रिपोर्ट के अनुसार स्टोररूम में मौजूद भौतिक साक्ष्यों को सुरक्षित या संरक्षित नहीं किया गया। समिति ने कहा कि कानूनी तरीके से सील करने और निरीक्षण से पहले स्टोररूम की स्थिति बदल गई थी। बाद में नकदी के नोट उपलब्ध नहीं रहे। समिति ने इस बात को भी अस्पष्ट माना कि ये नोट आखिर कहां गए।

जस्टिस वर्मा के जवाब पर समिति ने क्या कहा?
रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस वर्मा की ओर से खास तौर पर 22 मार्च 2025 को दिए गए जवाब और उसके बाद अपनाए गए रुख को समिति ने परिस्थितियों के अनुरूप स्पष्ट और संतोषजनक नहीं पाया। समिति ने कहा कि जवाब में वह स्पष्टता, पारदर्शिता और संस्थागत जिम्मेदारी नहीं दिखी, जिसकी इन परिस्थितियों में अपेक्षा थी। स्वतंत्र आधिकारिक गवाहों और अन्य पुष्टिकारक सामग्री के साथ जवाब की तुलना करने पर समिति ने उसे टालमटोल वाला और असंतोषजनक माना।

कब गठित की गई थी समिति?
जस्टिस वर्मा के खिलाफ जांच के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 12 अगस्त 2025 को तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। बाद में समिति का पुनर्गठन किया गया। इसमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर और वरिष्ठ अधिवक्ता बीवी आचार्य शामिल रहे। समिति ने अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को मई 2026 में सौंप दी थी। जस्टिस वर्मा ने नौ अप्रैल 2026 को राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। इसके बावजूद जांच समिति की रिपोर्ट को संसद में रखने की प्रक्रिया जारी रही। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा था कि रिपोर्ट मानसून सत्र में दोनों सदनों के समक्ष रखी जाएगी।

आखिर क्या है जस्टिस यशवंत वर्मा का कैश कांड?
यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था। दिल्ली के 30, तुगलक क्रिसेंट स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास के स्टोररूम में आग लगने के बाद वहां बड़ी मात्रा में rs 500 के नोट मिले। इसके बाद नकदी की मौजूदगी, उसके स्रोत और स्वामित्व को लेकर सवाल उठे। जस्टिस वर्मा ने नकदी से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया और सफाई दी। उन्होंने दावा किया था कि इसमें किसी की साजिश हो सकती है। मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई। अब समिति ने अपनी रिपोर्ट में उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को साबित माना है। इनमें नकदी को लेकर संतोषजनक स्पष्टीकरण न देना, साक्ष्यों के संरक्षण में गंभीर चूक और जांच के दौरान दिए गए जवाब को असंतोषजनक पाया जाना शामिल है।

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