नई दिल्ली। इतिहास के हर पन्ने पर उन स्वतंत्रता सेनानियों की गाथाएं दर्ज हैं जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। आमतौर पर क्रांतिकारी नेताओं और आंदोलनकारियों की बहादुरी ही सुर्खियों में रहती है, लेकिन पर्दे के पीछे कुछ ऐसे कारोबारी भी थे जिन्होंने चुपचाप आजादी की लड़ाई को आर्थिक मजबूती दी। उन्होंने तन-मन के साथ धन भी दांव पर लगाया, मगर उनका नाम आज भी कई लोगों को नहीं पता। आइए जानते हैं ऐसे 8 उद्योगपतियों और व्यापारियों के बारे में, जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में आर्थिक सहयोग देकर आंदोलन को नई ताकत दी।

सर दोराबजी टाटा

एक दूरदर्शी उद्योगपति, सर दोराबजी टाटा ने राष्ट्रवादी आंदोलनों को मजबूती देने में अहम आर्थिक मदद की। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जैसी संस्थाओं को आर्थिक सहयोग दिया और विदेश में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के लिए स्कॉलरशिप की पहल में भी बड़ा योगदान दिया।

जमनालाल बजाज

गांधीवादी जमनाल बजाज ने महात्मा गांधी के आंदोलनों को आगे बढ़ाने के लिए अपनी संपत्ति झोंक दी। उनका सहयोग सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं था। दांडी मार्च और सविनय अवज्ञा जैसे अभियानों की योजना और आयोजन में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

पुरुषोत्तमदास ठाकुरदास

महात्मा गांधी के करीबी सहयोगी ठाकुरदास भार्गव ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने कांग्रेस की कई गतिविधियों के लिए आर्थिक मदद दी और भारतीय उद्योगपतियों तथा राष्ट्रीय आंदोलन के बीच सेतु बनकर काम किया।

हाजी उस्मान सईत

हाजी उस्मान सईत को “कांग्रेस का कैशबैग” कहा जाता था। एक संपन्न व्यापारी परिवार में जन्मे उस्मान ने अपने पिता के साथ मिलकर ‘कैश बाजार’ नाम का शॉपिंग सेंटर शुरू किया। वे कांग्रेस को हर कदम पर उदार वित्तीय मदद देते थे और आजादी की लड़ाई में पार्टी की रीढ़ बने रहे।

जीडी बिड़ला

घनश्याम दास बिड़ला की आर्थिक मदद ने स्वतंत्रता आंदोलन को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने गांधीजी के कार्यों को पूरा समर्थन दिया और असहयोग आंदोलन व सविनय अवज्ञा जैसे अभियानों के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध कराई।

सेठ हुकुमचंद

प्रमुख उद्योगपति और फाइनेंसर सेठ हुकुमचंद, गांधीजी की विचारधारा के बड़े समर्थक थे। आजादी के लक्ष्य से चलाए गए कई आंदोलनों को उनके आर्थिक सहयोग से ही बल मिला।

सरला देवी चौधरानी

नारीवादी विचारक और स्वतंत्रता सेनानी सरला देवी ने आजादी की लड़ाई में अपने आर्थिक संसाधनों से भरपूर मदद की। उन्होंने फंड जुटाने के अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई और आंदोलन में महिलाओं को आगे लाने के लिए लगातार प्रयास किए।

तिरुपुर कुमारन

तमिलनाडु के तिरुपुर कुमारन भले ही ज्यादा चर्चित न हों, लेकिन उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई। आंदोलन के लिए फंड जुटाने के लिए उन्होंने अपने परिवार के गहने तक बेच दिए थे।

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