नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान आयातित रसोई गैस की सप्लाई कम होने के बाद अब सरकार ने घरेलू तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) उत्पादन बढ़ाने के लिए पहली बार अलग-अलग रिफाइनरी इकाइयों और तेल-गैस कंपनियों के लिए अधिकतम उत्पादन लक्ष्य तय किए हैं।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के 13 अगस्त के आदेश के तहत 21 रिफाइनरी और अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए कुल 63,810 टन प्रतिदिन का तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) उत्पादन क्षमता निर्धारित की गई है। यह 31 मार्च, 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के घरेलू एलपीजी उत्पादन का दोगुना से भी अधिक है। साथ ही यह आंकड़ा देश की 70 प्रतिशत दैनिक खपत के बराबर है। ये लक्ष्य आपूर्ति में कमी की स्थिति में लागू होंगे।

3.32 करोड़ टन एलपीजी की खपत हुई

भारत में वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 3.32 करोड़ टन एलपीजी की खपत हुई, जबकि घरेलू उत्पादन लगभग 1.31 करोड़ टन रहा। करीब 2.13 करोड़ टन एलपीजी का आयात करना पड़ा। यानी देश अपनी एलपीजी जरूरत का 64 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है।
सरकार का यह कदम उस संकट की पृष्ठभूमि में आया है, जब पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एलपीजी का आयात प्रभावित हुआ था। उस दौरान घरेलू एलपीजी की सप्लाई बनाए रखने के लिए रिफाइनरी कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को आपूर्ति सीमित करने तथा घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रिफिल बुकिंग की अवधि बढ़ाने जैसे कदम उठाने पड़े थे।

रिलायंस के लिए सबसे ज्यादा लिमिट

नए आदेश के तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर स्थित घरेलू बाजार के लिए संचालित रिफाइनरी को सबसे बड़ा लक्ष्य दिया गया है। उसे जरूरत पड़ने पर 18,000 टन प्रतिदिन एलपीजी उत्पादन करना होगा। वहीं, रूस की रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी के लिए 4,480 टन प्रतिदिन का लक्ष्य तय किया गया है।
सार्वजनिक क्षेत्र की 18 रिफाइनरी इकाइयों को मिलाकर 31,470 टन प्रतिदिन एलपीजी उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है। रिलायंस की जामनगर स्थित केवल निर्यात के लिए संचालित दूसरी रिफाइनरी के लिए कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है।

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