राजस्थान के डूंगरपुर जिले की सागवाड़ा नगरपालिका चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है. नामांकन प्रक्रिया पूरी होने से ठीक पहले बीजेपी ने अपनी घोषित सूची में बड़ा फेरबदल करते हुए पांच वार्डों में प्रत्याशी बदल दिए हैं. पार्टी द्वारा लिए गए इस फैसले के बाद स्थानीय राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. सबसे ज्यादा चर्चा वार्ड नंबर 5 को लेकर है, जहां बीजेपी जिलाध्यक्ष अशोक पटेल की पुत्रवधू वर्षा हसमुख पटेल का टिकट काट दिया गया है और कोकिला को उम्मीदवार बनाया गया है.
सागवाड़ा नगरपालिका के 35 वार्डों में चुनाव होना है. बीजेपी ने पहले चरण में अपने प्रत्याशियों की सूची जारी की थी, लेकिन नामांकन के अंतिम दौर में पार्टी ने वार्ड संख्या 3, 5, 15, 16 और 25 के उम्मीदवारों में बदलाव किया है. अचानक हुए इस बदलाव को लेकर पार्टी के भीतर और स्थानीय राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं.
नामांकन के अंतिम दौर में BJP ने बदले प्रत्याशी
बीजेपी की ओर से जारी पहली सूची में जिन प्रत्याशियों के नाम घोषित किए गए थे, उनमें से पांच नामों को बाद में बदल दिया गया है. पार्टी ने संशोधित सूची के जरिए इन वार्डों में नए चेहरों को चुनाव मैदान में उतारा. जानकारी के अनुसार, वार्ड नंबर 3 में वर्षा अहारी की जगह हेमा अहारी, वार्ड नंबर 5 में वर्षा हसमुख पटेल की जगह कोकिला, वार्ड नंबर 15 में राजू माली की जगह कपिल, वार्ड नंबर 16 में पुष्पा डेंडोर की जगह रेखा कटारा और वार्ड नंबर 25 में विजय गवारिया की जगह प्रकाश खटीक को प्रत्याशी बनाया गया है. अब नामांकन के बिल्कुल अंतिम समय में हुए इन बदलावों ने चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं.
वार्ड 5 के बदलाव पर सबकी नजर
इन पांच बदलावों में वार्ड नंबर 5 का फैसला राजनीतिक रूप से खास माना जा रहा है. पहली सूची में बीजेपी ने वर्षा हसमुख पटेल को उम्मीदवार बनाया था. वर्षा बीजेपी जिलाध्यक्ष अशोक पटेल की पुत्रवधू बताई जा रही हैं. बाद में पार्टी ने उनका नाम हटाकर कोकिला को प्रत्याशी बना दिया.
इस बदलाव के बाद सागवाड़ा की राजनीति में यह सवाल चर्चा में है कि आखिर अंतिम समय में उम्मीदवार बदलने की जरूरत क्यों पड़ी? हालांकि, बीजेपी की ओर से इस बदलाव के पीछे आधिकारिक तौर पर क्या कारण रहा, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है.
अध्यक्ष पद बना चुनाव का अहम फैक्टर
सागवाड़ा नगरपालिका में अध्यक्ष पद ओबीसी महिला वर्ग के लिए आरक्षित है. ऐसे में इस बार पार्षद चुनाव के साथ-साथ अध्यक्ष पद को लेकर भी राजनीतिक समीकरण महत्वपूर्ण हो गए हैं. यही वजह है कि महिला प्रत्याशियों के चयन को लेकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों की रणनीति पर नजर रखी जा रही है.
अध्यक्ष पद के आरक्षण के चलते चुनाव मैदान में उतारी जा रही ओबीसी महिला पार्षदों को लेकर भी राजनीतिक दलों के भीतर चर्चा तेज है. ऐसे में बीजेपी द्वारा अंतिम समय में पांच वार्डों के प्रत्याशी बदलने को इसी व्यापक चुनावी रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है. हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है.
BJP के अंदर टिकट वितरण को लेकर चर्चा
प्रत्याशियों में बदलाव के बाद बीजेपी की टिकट वितरण प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में पार्टी के भीतर दावेदारों, समर्थकों और वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता की बातें सामने आ रही हैं. कुछ टिकटों को लेकर सिफारिश और दबाव की चर्चाएं भी हैं, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
वहीं, कांग्रेस से बीजेपी में आए कुछ नेताओं और उनके समर्थकों को टिकट दिए जाने को लेकर भी चुनाव से पहले चर्चा रही है. अब पांच वार्डों में उम्मीदवार बदलने के बाद पार्टी के भीतर टिकट को लेकर बने समीकरणों पर भी निगाहें टिक गई हैं.
कांग्रेस ने BJP पर साधा था निशाना
चुनावी माहौल के बीच दिनेश खोड़निया ने हाल ही में बीजेपी की चुनावी रणनीति और संभावित अध्यक्ष पद के चेहरे को लेकर आरोप लगाए थे. उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए टिकट और अध्यक्ष पद को लेकर सवाल खड़े किए थे.
खोड़निया ने आरोप लगाया था कि बीजेपी ऐसे व्यक्ति को अध्यक्ष पद का चेहरा बना सकती है जो भारी पोटली देगा. हालांकि, यह कांग्रेस नेता की ओर से लगाया गया राजनीतिक आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
अब बदले समीकरणों पर रहेगी नजर
सागवाड़ा नगरपालिका चुनाव में नामांकन प्रक्रिया के दौरान बीजेपी की ओर से पांच वार्डों में प्रत्याशी बदलने के बाद चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है. खासतौर पर वार्ड नंबर 5 में हुआ बदलाव राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है.
अब देखना होगा कि बीजेपी के इस आखिरी समय के फेरबदल का चुनावी मैदान पर कितना असर पड़ता है. जिन प्रत्याशियों के टिकट बदले गए हैं, उनके समर्थकों की प्रतिक्रिया और नए उम्मीदवारों को पार्टी कार्यकर्ताओं का कितना समर्थन मिलता है यो तो चुनावी नतीजे ही बता सकेंगे.
सागवाड़ा में अध्यक्ष पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित होने के कारण इस बार सिर्फ वार्ड की जीत-हार ही नहीं, बल्कि अध्यक्ष पद के संभावित समीकरणों पर भी सभी राजनीतिक दलों की नजर है. ऐसे में बीजेपी का यह टिकट फेरबदल आने वाले चुनावी परिणामों के लिहाज से कितना अहम साबित होता है, इसका फैसला मतदाताओं के रुख से होगा।



















