उत्तर प्रदेश के कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अपने जातीय टिप्पणी वाले वीडियो पर सफाई दी है. उन्होंने कहा कि आजकल लोग सोशल मीडिया पर जातीय वैमनस्य फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसको लेकर मैंने अपनी खिन्नता व्यक्त की थी. बृजभूषण सिंह ने कहा कि मेरे बचपन से आजतक लगभग सभी जातियों का एहसान मुझ पर है.
इसके साथ ही बृजभूषण शरण सिंह राहुल गांधी और विपक्षी इंडिया गठबंधन पर निशाना साधा है, बोले ये लोग देश विरोधी विचारधार के लोगों का समर्थन कर रहे हैं. साथ ही संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने पर भी नाराजगी जाहिर की.
डा में मुसलमानों ने मुझ पर गोली चलाई थी- बृजभूषण शरण सिंह
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, “यह मेरे दिल का दर्द था. एक बार गोंडा में मुसलमानों ने मुझ पर गोली चलाई थी, और गोंडा के एसपी ने सभी रास्ते बंद कर दिए थे. यहां तक कि मेरे परिवार के लोग भी मुझ तक नहीं पहुंच पाए. अस्पताल पहुंचने वाले सबसे पहले व्यक्ति लाल कालिया थे, जिन्हें यूनुस के नाम से भी जाना जाता है, और वे एक मुसलमान थे. तो, जिस व्यक्ति ने मुझ पर गोली चलाई वह मुसलमान था, और जिसने मुझे बचाया, वह भी एक मुसलमान ही था. अगले दिन, मुझे एक मेडिकल कॉलेज ले जाया गया क्योंकि वहां भी एक और हमले का डर था. मुझे सुरक्षित घर वापस लाने से पहले, पूरी रात लोगों ने मेरी निगरानी की. मेरे बचपन से लेकर आज तक लगभग सभी जातियों का एहसान है.”
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने आगे कहा कि आजकल सोशल मीडिया पर जातीय वैमनस्य फैलाने की कोशिश कुछ लोग कर रहे हैं, जिसको लेकर उन्होंने अपनी पोस्ट के माध्यम से नाराजगी व्यक्त की थी.
विपक्ष के रवैये से हैरान
चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं पर विपक्ष के सवाल उठाने पर कहा, “यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है. इनमें ऐसे लोग शामिल हैं जो उमर खालिद का समर्थन करते हैं और जिन्होंने समाज और राष्ट्र के खिलाफ देश-विरोधी नारे लगाए थे. इनका गठबंधन बहुत पहले ही बन चुका था. जब से सोनिया जी के हटने के बाद राहुल गांधी नेता बने हैं, तब से वामपंथी विचारधारा वाले लोगों ने उन्हें घेर लिया है. कुछ सलाहकार के रूप में, तो कुछ दोस्त के रूप में आकर बैठ गए हैं.”
उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद से संवैधानिक संस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं. बोले कि 2023 से पहले चुनाव आयुक्त नियुक्ति कोई व्यवस्था नहीं थी. उसके बाद फिर ये पालिसी बनी. कांग्रेस पर तंज कसते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने नवीन चावला और केपीएस गिल के आयुक्त बनने पर सवाल उठाए.
इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि कानून बदलने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएं या चुनकर आयें फिर कानून बनाए. लेकिन आप प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट को मानेंगे नहीं ये सब बांग्लादेश की तर्ज पर दबाब बनाने की रणनीति पर हैं. इनकी पोल खुल चुकी है, देश इनको माफ नहीं करेगा.



















