मंगल को सभी ग्रहों का सेनापति माना गया है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब मंगल किसी की जन्म कुंडली में अशुभ स्थिति में होते हैं तो उसे क्रोधी और बात बात पर नाराज होने वाला बना देते हैं. मंगल शुभ हैं या अशुभ इसका पता आसानी से लगाया जा सकता है. व्यक्ति के स्वभाव से इसका अदांजा लगाया जा सकता है. यदि व्यक्ति हर समय गुस्से में रहता है तो समझ जाना चाहिए कही न कहीं मंगल अशुभ फल दे रहे हैं.
बच्चों को जिद्दी और शरारती भी बनाता है मंगल
बच्चों के स्वभाव को मंगल बहुत जल्दी प्रभावित करता है. बच्चा अधिक शरारत करने लगे या हर बात पर जिद्द करने लगे तो मंगल की स्थिति की स्थिति का पता लगा कर उसका उपाय करना चाहिए. उपाय करने से मंगल के प्रभाव को कम किया जा सकता है.
मंगल के कारण व्यक्ति भारी मुसीबत में पड़ जाता है
क्रोध करना अच्छा नहीं माना गया है. शास्त्रो में क्रोध को व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु माना गया है. क्रोध कभी कभी व्यक्ति के करियर और जीवन में परेशानी पैदा कर देता है. कई ऐसे लोग भी होते हैं जो लाख चाहने के बाद भी अपने क्रोध या गुस्से पर काबू नहीं कर पाते हैं, जिसके उन्हे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं.
अशुभ मंगल के लक्षण
जन्मकुंडली में मंगल अशुभ होने की दशा में व्यक्ति को रक्त संबंधी समस्या, गर्म खून बात बात पर क्रोध आना, हमेशा गलत काम करने के विचार आना, मारपीट करने जैसे विचार मन में आते हैं. वहीं नियमों को तोडऩे का प्रयास भी व्यक्ति करता है. इसके साथ ही मंगल अशुभ हो तो शादी विवाह में भी बाधा डालता है कभी कभी तलाक का कारण भी बन जाता है.
मंगल की अशुभता को दूर करने के उपाय
मंगल की अशुभता को समय रहते ही दूर करने का प्रयास करना चाहिए. मंगल को शांत करने के लिए प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए. सुंदरकांड का नियमित पाठ करें. सुंदरकांड का नियमित पाठ करने से मंगल की अशुभता जल्दी दूर होती है. मंगलवार का व्रत रखें. महिलाओं का सम्मान करें. मांसाहारी भोजन से दूर रहें. मदिरा या नशीले पदार्थों का सेवन न करें.
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