कोलकाता: नेशनल सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई ने बंगाल के बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। गुजरात से आने वाले NCPI में टीएमसी के बागी सांसद यूसुफ पठान को प्रमोशन मिलने के बाद अब यह माना जा रहा है कि वह एनसीपीआई में ही रहेंगे। अभी इसकी अध्यक्ष ककोली घोष दस्तीदार हैं जबकि इसकी स्थाापना शेवडी कुंडू ने की थी। यूसुफ पठान के एकाएक एनसीपीआई में एलीवेशन ने कई सवाल खड़ कर दिए हैं। चर्चा हो रही है कि क्या यूसुफ पठान ही इस पार्टी का प्रमुख फेस बनेंगे, क्योंकि वे एक सेलिब्रेटी स्टेट्स रखते हैं।
क्या सच होगा बासुनिया का दावा
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से बगावत कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए कूचबिहार के सांसद जगदीश चंद्र वर्मा बासुनिया ने सितंबर 2026 में एक बड़ा दावा किया था। उन्होंने कहा था कि एनसीपी के 20 बागी सांसदों में से 17 सांसद अक्टूबर में दुर्गा पूजा से पहले या उसके तुरंत बाद बीजेपी शामिल हो जाएंगे। 20 में 17 सांसद हिंदू हैं। बासुनिया के इस बयान से पहले भी यह अटकलें सामने आई थीं कि 20 बागियों में शामिल तीन मुस्लिम सांसद ममता बनर्जी के पास लौट सकते हैं, हालांकि बाद में तीनों सांसदों ने बीजेपी को समर्थन देने की बात कही थी।
यूसुफ पठान के प्रमोशन के मायने
यूसुफ पठान समेत दो अन्य (अबू ताहेर खान और खलीलुर रहमान) मुस्लिम सांसदों की मुश्किल यह है कि वे बीजेपी के साथ नहीं जा सकते हैं क्योंकि उनके चुनाव क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता काफी हैं और बीजेपी में जाने से वह नाराज हो सकते हैं। टीएमसी के बागी सांसदों के बीजेपी में जाने की अटकलों के बीच यूसुफ पठान को एनसीपीआई का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने से बंगाल से लेकर गुजरात तक हलचल सामने आई है। चर्चा हो रही है कि अगर एनसीपीआई में यूसुफ पठान रहते हैं तो क्या वे इस पार्टी का विस्तार गुजरात तक करेंगे। अगर ऐसा हुआ तो गुजरात में कांग्रेस और आप की दिक्कत बढ़ सकती है। गुजरात में अभी बीजेपी के अलावा दो प्रमुख दल हैं। इसमें कांग्रेस और फिर आम आदमी पार्टी है। गुजरात में अगले साल के अंत में विधानसभा चुनाव होंगे।



















