सनातन धर्म पितरों का सबसे ज्यादा महत्व बताया गया है।सभी ग्रंथों और शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है कि जीवन में सुख प्राप्त करने के लिए पितरों का आशीर्वाद बहुत जरूरी है। उनकी कृपा या प्रसन्नता के बिना कोई भी सुख नहीं मिल सकता। ज्योेतिष ग्रंथों के अनुसार पितर या पितृ प्रसन्न हों तो आपके सभी मनोरथ पूरे हो सकते हैं। सालभर हर अमावस्या पर हम पितरों को तर्पण कर सकते हैं। श्राद्ध पक्ष तो उन्हीं को समर्पित है। इस अवधि में श्राद्ध और तर्पण करने से पितर प्रसन्न होते हैं। वे अपने परिजनों को आशीर्वाद देते हैं जिससे उनके जीवन में सुख आता है। श्राद्ध पक्ष के दौरान पितरों की प्रसन्नता के संकेत भी प्राप्त होते हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि श्राद्ध पक्ष पितरों को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ मौका है। इन 16 दिनों में अपने पूर्वजों को याद करना चाहिए, उनकी स्मृति में तर्पण कर उनके निमित्त जरूरतमंदों को दान देना चाहिए। इससे पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। उनकी कृपा से आपके जीवन में खुशियां आती हैं, दुख-दर्द दूर होते हैं।
अचानक धन मिले तो समझिए प्रसन्न हैं आपके पूर्वज
पितर आपसे प्रसन्न हैं या नहीं इसके कुछ संकेतों का भी शास्त्रों में उल्लेख किया गया है। अगर आपको अचानक कहीं से धन प्राप्त होने लगे तो समझिए आपके पितर प्रसन्न हैं। अगर आपको सपने में सांप दिखाई दे लेकिन उसे देखकर आप डरे नहीं तो यह पितरों की प्रसन्नता का संकेत है। अटके हुए काम पूरे होने लगें या फिर कोई नया काम शुरू हो तो इसे भी पितरों का आशीर्वाद माना जाता है।
पितरों को पूरी श्रद्धा से याद करें और अपना काम पूरा करने की प्रार्थना करें
ज्योतिषार्चा पंडित अरुण बुचके बताते हैं कि जिन लोगों पर पितरों का आशीर्वाद होता है उन्हें पितर पक्ष में शुरु किए गए किसी भी नए काम में लाभ मिलता है। श्राद्ध पक्ष में पितरों के आशीर्वाद से काम बनाने के लिए एक छोटा सा उपाय कर सकते हैं। यदि आपका कोई काम अटक रहा है, पूरे प्रयास के बाद भी सफल नहीं हो पा रहा है तो आप अपने पितरों को पूरी श्रद्धा से याद करें और अपना काम पूरा करने की प्रार्थना करें। पितरों को याद कर लेने मात्र से ही वह काम पूरा हो जाता है तो जान लें कि आपके ऊपर पितरों की विशेष कृपा है।
(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।



















