चाणक्य की चाणक्य नीति कहती है कि व्यक्ति को सफलता उसके स्वभाव से मिलती है. व्यक्ति जब अच्छी आदतों को अपनाता है तो उसके सफल होने की संभावना बढ़ जाती है. वहीं गीता उपदेश में भी व्यक्ति को अच्छे गुणों को अपनाने के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए बताया गया है. विदुर को धर्मराज का अवतार माना गया है. विदुर की विदुर नीति भी कहती है कि व्यक्ति को यदि जीवन में सफलता प्राप्त करनी है तो अच्छे गुणों को अपनाना चाहिए. विदुर के बारे में कहा जाता है कि वे सत्य के समर्थक थे. और विदुर ने जीवन में कभी झूठ नहीं बोला. उन्होंने हमेशा सत्य का ही साथ दिया. विद्वानों का भी मत है कि व्यक्ति को अपनी अच्छी आदतों को लेकर सर्तक और गंभीर रहना चाहिए. इनमें से एक आदत के बारे में आज चर्चा करते हैं-
मधुर वाणी बोलने वाला सभी का प्रिय होता है
विद्वानों का कहना है कि व्यक्ति को सदैव ही मीठी वाणी बोलनी चाहिए. वाणी ऐसी होनी चाहिए कि लोगों के कानों में जब प्रवेश करें तो उन्हें सुनने में आनंद आए. जो वाणी लोगों को परेशान करे, ऐसी वाणी का प्रयोग नहीं करना चाहिए. जिन लोगों की वाणी मधुर और प्रभावशाली होती है वे सभी के प्रिय होते हैं. इतना ही नहीं जो व्यक्ति वाणी के प्रयोग में लापरवाह होते हैं वे दुख उठाते हैं. चाणक्य के अनुसार वाणी का प्रयोग व्यक्ति को बहुत ही सोच समझकर करना चाहिए. वाणी कर्कश नहीं होनी चाहिए.
ज्ञान और संस्कार से वाणी मधुर होती है
वाणी मधुर तभी होती है जब व्यक्ति ज्ञान की पूजा करता हो और संस्कारों को अपनाता हो. संस्कार और ज्ञान से युक्त व्यक्ति की वाणी में एक तेज होता है जो सभी का आकर्षित करता है. विदुर नीति कहती है कि वाणी से ही व्यक्ति कठोर से कठोर व्यक्ति के हृदय को भी परिवर्तित कर सकती है. ऐसा व्यक्ति शत्रु को भी मित्र बना लेता है. मधुर वाणी बोलने वाला व्यक्ति सभी का प्रिय होने के साथ साथ हर जगह सम्मान भी प्राप्त करता है.

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