एलन मस्क ने 7 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि भारत में ‘कुछ ओलिगार्क’ स्टारलिंक को रोक रहे हैं ताकि उनका ‘मोनोपोलिस्टिक चोकहोल्ड’ बना रहे. अगले ही दिन उन्होंने सीधे मुकेश अंबानी का नाम लेते हुए पूछा, ‘क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?’. सरकार ने इन आरोपों को ‘बेबुनियाद’ बताया और कहा कि तीनों सैटकॉम कंपनियों यानी स्टारलिंक, जियो सैटकॉम और वन वेब की सिक्योरिटी क्लीयरेंस गृह मंत्रालय के पास लंबित है, किसी एक कंपनी के साथ भेदभाव नहीं हो रहा. इस बीच स्टारलिंक की VP लॉरेन ड्रायर ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में कहा, ‘हम भारत की सेवा के लिए तैयार हैं, जैसे ही भारत तैयार होगा’.
तीनों को GMPCS लाइसेंस मिल चुका है, लेकिन कोई भी अभी तक कमर्शियल सेवा शुरू नहीं कर पाया है.
जियो और एयरटेल अभी मोबाइल टावर और फाइबर से देश के 90% से ज्यादा हिस्से में 4G, 5G और ब्रॉडबैंड पहुंचा चुके हैं. स्टारलिंक का पूरा मॉडल अलग है. वह सैटेलाइट के जरिए उन इलाकों में इंटरनेट पहुंचाएगा जहां फाइबर या मोबाइल टावर पहुंचाना मुश्किल या महंगा है.
दोनों तरफ दोस्ती भी है और जंग भी
जियो और एयरटेल दोनों ने स्टारलिंक के साथ MoU साइन किए हैं ताकि उसके इंटरनेट उपकरण अपने रिटेल स्टोर्स से बेच सकें. साथ ही, दोनों कंपनियां खुद भी सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में उतरने की तैयारी कर रही हैं. जियो ने 1,600 सैटेलाइट का अपना LEO कॉन्स्टेलेशन बनाने की घोषणा की है. यानी एक ही वक्त में साझेदारी और मुकाबला, दोनों चल रहे हैं.
स्टारलिंक कहां तक पहुंचा है?
स्टारलिंक ने भारत में 20 गेटवे साइट्स और सैकड़ों एंटेना लगा दिए हैं. कंपनी का दावा है कि उसने भारतीय सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पूरा ऑपरेशन डिजाइन किया है और भारतीय यूजर्स का डेटा भारत के अंदर ही रखेगी.
स्टारलिंक ने 2022 में लाइसेंस के लिए आवेदन किया था और जून 2025 में उसे DoT से लाइसेंस मिल गया. लेकिन अभी भी दो बड़ी अड़चनें बाकी हैं गृह मंत्रालय की सिक्योरिटी क्लीयरेंस और विदेशी निवेश (FDI) की मंजूरी.
भारत में स्टारलिंक की कीमत कितनी होगी?
स्टारलिंक ने अपनी वेबसाइट पर जो कीमत दिखाई थी, उसके मुताबिक महीने का प्लान 8,600 रुपए और हार्डवेयर किट 34,000 रुपए है. यह सामान्य मोबाइल इंटरनेट से 2 से 5 गुना महंगा है और हार्डवेयर लगभग 15 गुना महंगा. हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में 2,500 रुपए से 3,500 रुपए महीने की संभावित कीमत भी बताई जा रही है. सैटेलाइट इंटरनेट के लिए घर पर एक डिश/टर्मिनल लगाना जरूरी होगा.
सरकार का रुख क्या है?
संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा, ‘DoT ने सभी सैटकॉम कंपनियों को लाइसेंस और प्रोविजनल स्पेक्ट्रम दे दिया है. अब मामला MHA के पास सिक्योरिटी क्लीयरेंस के लिए लंबित है. जैसे ही मंजूरी मिलेगी, सबको मिल जाएगी. इसका किसी एक कंपनी से कोई लेना-देना नहीं है.’ सरकार का मुख्य डर यह है कि विदेशी सैटेलाइट ऑपरेटरों के जरिए भारतीय डेटा देश से बाहर न चला जाए.
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की जंग सिर्फ कंपनियों के बीच नहीं, बल्कि सुरक्षा, संप्रभुता और बाजार नियंत्रण के बीच है. स्टारलिंक के पास तकनीक और ग्लोबल अनुभव है, जियो और एयरटेल के पास भारतीय बाजार की गहरी समझ और मौजूदा नेटवर्क है.



















