रायपुर: भारत मौसम विज्ञान विभाग और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के कृषि मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार, अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान “अर्नब” (Arnab) कमजोर होकर डिप्रेशन (दबाव के क्षेत्र) में बदल चुका है. वर्तमान में यह दक्षिणी छत्तीसगढ़ और उससे लगे दक्षिणी ओडिशा के ऊपर केंद्रित है. इसके प्रभाव से छत्तीसगढ़ के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है.
कृषि और फसल सुरक्षा के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश
मौसम के इस मिदजाद को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि जिन किसानों की धान, दलहन और तिलहन फसलें पककर तैयार हैं, वे मौसम साफ होने तक (अगले 2 से 4 दिन) कटाई का कार्य टाल दें. जिन किसानों ने फसल काट ली है, वे उसे तुरंत सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर तिरपाल से ढककर रखें तथा खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी तुरंत सुनिश्चित करें. इसके अलावा, सब्जियों और बागवानी फसलों (जैसे लौकी, करेला, केला आदि) को तेज हवाओं से बचाने के लिए बांस या मचान का सहारा (स्टेकिंग) दें.
पशुपालन और आपदा प्रबंधन संबंधी सावधानियां
आने वाले दिनों में लगातार बारिश, तेज हवा और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की संभावना को देखते हुए पशुपालकों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है. पशुओं को खुले में छोड़ने के बजाय पूरी तरह सूखे और सुरक्षित स्थानों पर बांधें तथा गरज-चमक के दौरान उन्हें पेड़ों के नीचे बिल्कुल आश्रय न दें. साथ ही, यदि चक्रवात या बारिश से फसलों को कोई नुकसान पहुंचता है, तो बीमित किसान तुरंत कृषि विभाग या बीमा कंपनी को इसकी सूचना दें और आवश्यक दस्तावेज व तस्वीरें सुरक्षित रखें.



















