जैसलमेर: जैसलमेर जिले में सूने मकानों को निशाना बनाने वाली एक बेहद शातिर चोरी गैंग का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के काम करने का तरीका जानकर हर कोई हैरान है। आरोपी गांव के बाहर अपनी बोलेरो गाड़ी खड़ी कर देते थे और रात के अंधेरे में पैदल ही गांव में दाखिल होते थे। इसके बाद मकानों की रेकी कर ताले तोड़ते और सोने-चांदी के जेवर व नकदी समेटकर फरार हो जाते थे। पकड़े जाने से बचने के लिए आरोपी वारदात के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल तक नहीं करते थे।
हालांकि, जैसलमेर पुलिस की मुस्तैदी के आगे इनकी चालाकी धरी की धरी रह गई। पुलिस ने करीब 2500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, 100 से ज्यादा टीमों को जांच में लगाया और संदिग्ध बोलेरो का 1500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक पीछा करते हुए चित्तौड़गढ़ से पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
7 थाना क्षेत्रों में कबूली चोरी की वारदातें
मामले का खुलासा करते हुए जैसलमेर के पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे ने बताया कि पकड़े गए गिरोह ने जिले के चेलक और भैंसड़ा में हुई बड़ी चोरियों के साथ-साथ कुल 7 थाना क्षेत्रों खुहड़ी, सदर जैसलमेर, भणियाणा, सांगड़ और फलसूंड में चोरी की वारदातें स्वीकार की हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जसवंत कंजर, लोकेश कंजर, बहादुर दरोगा, धर्मराज दरोगा और राहुल कुमार सोनी के रूप में हुई है।
गांव के बाहर गाड़ी खड़ी कर पैदल करते थे रेकी
एसपी ने बताया कि चेलक और भैंसड़ा गांव में हुई चोरियों के बाद पुलिस ने लगातार 20 दिनों तक सघन अभियान चलाया। जांच में सामने आया कि आरोपी किसी भी गांव में घुसने से पहले अपनी बोलेरो गाड़ी को काफी दूर बाहर खड़ी कर देते थे। फिर पैदल घूमकर ऐसे घरों की रेकी करते थे जहां ताले लगे हों या सन्नाटा हो। मौका मिलते ही वारदात को अंजाम देकर तय ठिकाने पर लौटते और बोलेरो से चंपत हो जाते थे।



















