अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्राइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। यह चर्चा ऐसे समय हुई है जब अमेरिका ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों और कूटनीतिक समाधान पर विचार कर रहा है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब वाशिंगटन ईरान के खिलाफ नए सिरे से सैन्य कार्रवाई की संभावनाओं का आकलन कर रहा है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने इस बातचीत से परिचित सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
क्या ईरान पर हमला करेगा अमेरिका?
अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सप्ताह की शुरुआत में व्हाइट हाउस में हुई एक बैठक के बाद दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत हुई। इस बैठक में ट्रंप ने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने के संभावित विकल्पों पर चर्चा की थी। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर विभिन्न रणनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहा है। हालांकि, बातचीत में किन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई और किसी सैन्य कार्रवाई को लेकर क्या फैसला लिया गया, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत लगातार जारी है और इसमें कोई रुकावट नहीं आई है। हालांकि, उन्होंने बातचीत की समयसीमा या अब तक हुई प्रगति के बारे में कुछ भी बताने से इनकार किया। रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आगे सैन्य कार्रवाई को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया है।
विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने क्या कहा?
जॉर्जिया में जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के समापन पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए रुबियो ने कहा कि अमेरिका अब भी ऐसे कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है, जो उसकी बुनियादी सुरक्षा चिंताओं को दूर कर सके। उन्होंने ईरान पर वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाकर समुद्री क्षेत्र में आक्रामक गतिविधियां करने और मध्य पूर्व में अस्थिरता फैलाने वाले सशस्त्र समूहों का समर्थन करने का आरोप भी लगाया।
रुबियो ने कहा, ‘कई स्तरों पर बातचीत चल रही है और यह कभी रुकी ही नहीं। कुछ मामलों में सीधे तौर पर, जबकि ज्यादातर मामलों में मध्यस्थों के जरिए सक्रिय बातचीत हो रही है।’ अमेरिकी विदेश मंत्री से पूछा गया था कि सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने से पहले वाशिंगटन कूटनीतिक प्रयासों को कितना समय देना चाहता है। इस पर उन्होंने कहा कि बातचीत की समयसीमा तय करने का अधिकार केवल राष्ट्रपति के पास है। उन्होंने यह बताने से भी परहेज किया कि किसी अंतिम समझौते के करीब पहुंचा जा चुका है या नहीं। रुबियो ने कहा, ‘मैं न तो इन वार्ताओं की प्रगति पर कोई टिप्पणी करूंगा और न ही इनकी समयसीमा बताऊंगा। हालांकि, इतना जरूर कह सकता हूं कि अगर कोई कूटनीतिक समाधान निकलता है तो अमेरिका इसके लिए तैयार रहेगा।’
राष्ट्रीय सुरक्षा हितों पर क्या बोला अमेरिका?
रुबियो ने जोर देकर कहा कि किसी भी समझौते में अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा होनी चाहिए। साथ ही, उन चिंताओं का समाधान भी जरूरी है, जिनकी वजह से मौजूदा संकट पैदा हुआ है। उन्होंने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं और क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को उसके समर्थन को अमेरिका की प्रमुख चिंताओं में शामिल बताया। उनके मुताबिक, अमेरिका किसी कूटनीतिक समझौते के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसके जरिए उसकी सुरक्षा से जुड़े बुनियादी मुद्दों का समाधान होना जरूरी है।
रुबियो ने ईरान पर नए सिरे से हमले की संभावना को लेकर किसी भी सैन्य योजना पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में हैं, लेकिन अमेरिका अपनी सैन्य क्षमताओं को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है। रुबियो ने कहा कि अगर अमेरिका सैन्य उद्देश्यों को हासिल करना चाहे तो ऐसा करने में सक्षम है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रंप ने अभी तक आगे की सैन्य कार्रवाई को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है।
रुबियो का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत जारी रहने की बात कही जा रही है और वाशिंगटन संभावित सैन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है।



















