रायपुर। छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज दो दिवसीय महाधिवेशन तिल्दा राज के ग्राम अल्दा में आज 13 फरवरी से प्रारंभ हो चुका है, लेकिन समाज का यह अधिवेशन राजनीति का अखाड़ा बनता सा प्रतीत हो रहा है। चुंकि समाज के केन्द्रीय अध्यक्ष एवं राजप्रधान पद के लिए निर्वाचन भी अप्रैल माह में होना है। इस लिहाज से केन्द्रीय अध्यक्ष एवं राजप्रधान के प्रत्याशीगण भी अपनी रणनीति के तहत चुनाव प्रचार कर रहे हैं। इस महाअधिवेशन के दौरान केन्द्रीय अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों ने महाधिवेशन के कार्यक्रम की रूपरेखा पर सवाल उठाते हुए असंतोष व्यक्त किया है। इन प्रत्याशियों का सवाल उठाना भी लाजिमी है क्योंकि जिस हिसाब से कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है उस हिसाब से केन्द्रीय अध्यक्ष के प्रत्याशियों को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया है। अपनी बात रखने का (संबोधन) मौका नहीं दिये जाने के कारण प्रत्याशियों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। इस संवाददाता से चर्चा के दौरान केन्द्रीय अध्यक्ष के प्रत्याशियों ने अपनी बात बेबाकी से रखी है। केन्द्रीय अध्यक्ष प्रत्याशी उमाकांत वर्मा का कहना है कि जब समाज के सभी राज अधिवेशनों में बोलने का मौका दिया गया है तो महा अधिवेशन में भी बोलने का मौका दिया जाना चाहिये। इसके अलावा अन्य प्रत्याशी चोवाराम वर्मा, सालिकराम वर्मा, अनिता वर्मा, का भी लगभग यही कहना है कि महाअधिवेशन के पहले दिन नहीं तो दूसरे दिन कम से कम 5 मिनट का मौका तो दिया जाना चाहिये। प्रत्याशियों के अलावा महाधिवेशन में पहुंचे सामाजिक लोगों के बीच महाधिवेशन के मंच में लगे बैनर को देख कर ऐसा लगता है जैसे समाज का नहीं कोई राजनीतिक कार्यक्रम है, इस बैनर को लेकर समाज के बीच में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है। सामाजिक लोग दबे जुबान से यह कहते नहीं चुक रहे हैं कि एक तरफ कांग्रेस-तो दूसरी तरफ भाजपा, कुल मिलाकर समाज के इस महाधिवेशन का राजनीतिकरण हो रहा है।
छत्त्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज का महाअधिवेशन बना राजनीति का अखाड़ा…?, संबोधन का मौका नहीं मिलने से केन्द्रीय अध्यक्ष प्रत्याशियों में असंतोष…
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