अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित वेस्ट पाम बीच के नजदीक 1 नवंबर को हुए छोटे निजी जेट ‘लियरजेट 60’ के दर्दनाक हादसे की शुरुआती वजहें मौसम के जानलेवा मिजाज की ओर इशारा कर रही हैं. इस हादसे में नौ लोगों की जान चली गई.
फ्लाइट डेटा और मौसमी रिकॉर्ड्स के मुताबिक, आसमान में चंद मिनटों के भीतर तेजी से फैले एक आंधी-तूफान वाले घने बादल (क्यूम्युलोनिम्बस) ने विमान को अपनी चपेट में ले लिया. राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (NTSB) मामले की विस्तृत जांच में जुटा है, लेकिन शुरुआती संकेत गंभीर टर्बुलेंस, सिस्टम विफलता और विंग्स पर अचानक बर्फ जमने (Icing) को मुख्य कारण बता रहे हैं.
20 मिनट में 48 हजार फीट तक पहुंच गया था आंधी वाला बादल
मौसम आंकड़ों के अनुसार, दोपहर करीब 12:47 बजे जब विमान रॉयल पाम बीच और वेस्टलेक क्षेत्र के ऊपर से गुजर रहा था, तब हवा का रुख अचानक आक्रामक हो गया. दोपहर 12:36 बजे जो बादल 33,000 फीट की ऊंचाई पर था, वह अपड्राफ्ट (नीचे से ऊपर उठने वाली हवा) के प्रचंड दबाव के कारण महज 20 मिनट में 48,300 फीट की ऊंचाई पर पहुंच गया. इस असामान्य हलचल ने नीचे की नमी और गर्म हवा को तेजी से ऊंचाई की ओर खींचा, जिससे विमान के आसपास अचानक खतरनाक बर्फ जमने की स्थिति पैदा हो गई.
‘मेडे’ कॉल से चंद सेकंड पहले क्या हुआ?
- फ्लाइट रिकॉर्ड्स के मुताबिक, विमान जब 35 हजार फीट की ऊंचाई पर था, तब बाहर का तापमान करीब -7.2 डिग्री सेल्सियस (-45°F) दर्ज किया गया था.
- दोपहर 12:37 बजे पायलटों ने खराब मौसम से बचने के लिए बाईं ओर मुड़ने की अनुमति मांगी थी, जो कंट्रोल टीम ने दे दी.
- 12:47 बजे सह-पायलट ने सूचना दी कि विमान की बॉडी पर हल्की पारदर्शी बर्फ जम रही है और मध्यम झटके लग रहे हैं.
- ठीक एक मिनट बाद (12:48 बजे) मूसलाधार बारिश से बचने के लिए पायलट ने विमान को 37 हजार फीट पर ले जाने की अनुमति मांगी.
- इस बातचीत के महज 20 सेकंड के भीतर कॉकपिट से आपातकालीन संदेश यानी ‘मेडे’ (Mayday) कॉल आई और उसके बाद विमान तेजी से नीचे गिर गया.
हवा में ही टूट गया था पिछला हिस्सा?
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के फुटेज में यह आशंका जताई जा रही है कि हादसे से ठीक पहले जेट का पिछला हिस्सा यानी ‘हॉरिजॉन्टल स्टेबलाइजर’ विमान से अलग हो गया था. विशेषज्ञों का मानना है कि बादल के भीतर हवा के भीषण थपेड़ों (Severe Turbulence) के चलते विमान के ढांचे पर भारी दबाव पड़ा होगा, जिससे यह संरचनात्मक नुकसान हुआ. हालांकि, NTSB जांच के बाद ही साफ होगा कि ढांचा हवा में टूटा या जमीन से टकराने के बाद अलग हुआ.
एविएशन सेफ्टी और मौसम की चेतावनी
विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे जेट विमानों के लिए मौसम का इतना तीव्र बदलाव घातक साबित हो सकता है. यह दुर्घटना दिखाती है कि पायलटों, ग्राउंड कंट्रोल और मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों के बीच वास्तविक समय (Real-time) में सटीक समन्वय कितना आवश्यक है. NTSB अब फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, ब्लैक बॉक्स और एयरफ्रेम के मलबे की पड़ताल कर दुर्घटना की अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी.



















