रतलाम: दीपावली पर देशभर के मंदिरों में मां लक्ष्मी का विशेष श्रृंगार किया जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश के रतलाम स्थित प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर की परंपरा सबसे अलग है। यहां मां के दरबार को फूलों और रोशनी के साथ करोड़ों रुपये की नकदी, विदेशी करेंसी और सोने-चांदी के आभूषणों से सजाया जाता है। मंदिर का नजारा ऐसा होता है कि श्रद्धालु कुछ देर के लिए ठहरकर इस अनूठे श्रृंगार को निहारते रह जाते हैं।
इस बार मंदिर में करीब 2 करोड़ रुपये के भारतीय नोट, 40 देशों की विदेशी करेंसी और बेशकीमती आभूषण सजावट का हिस्सा बने हैं। धनतेरस से भाईदूज तक पांच दिनों के इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
अपनी तिजोरी का खजाना मां के चरणों में सौंपते हैं भक्त
इस मंदिर की सबसे खास बात इसकी परंपरा है। यहां सजावट के लिए मंदिर प्रबंधन किसी बाहरी एजेंसी से धन या आभूषण नहीं जुटाता। देशभर के श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार नकदी, सोने-चांदी के जेवर और अन्य कीमती वस्तुएं मंदिर में जमा कराते हैं।
इस बार लगभग 2 हजार भक्तों ने अपनी अमानत मंदिर को सौंपी है। मान्यता है कि दीपावली के दौरान मां लक्ष्मी के दरबार में धन और आभूषण अर्पित करने से घर में सुख-समृद्धि और बरकत बनी रहती है। लेकिन इस परंपरा का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि भक्तों का धन स्थायी रूप से मंदिर में नहीं रखा जाता। पांच दिन का आयोजन पूरा होने के बाद उनकी जमा की गई राशि और आभूषण वापस कर दिए जाते हैं।
52 चांदी के हाथी और सिक्कों वाली साड़ी ने खींचा ध्यान
इस बार महालक्ष्मी मंदिर के श्रृंगार में चांदी की कलाकृतियां विशेष आकर्षण बनी हुई हैं। गर्भगृह में ढाई-ढाई किलो वजन के पांच बड़े चांदी के हाथियों के साथ 52 छोटे चांदी के हाथी सजाए गए हैं।
इसके अलावा 45 चांदी के सिक्कों से तैयार की गई विशेष साड़ी भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। मंदिर में मां महालक्ष्मी के साथ भगवान गणेश और माता सरस्वती विराजमान हैं। यहां मां के आठ स्वरूपों आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी सहित अन्य रूपों के दर्शन होते हैं।
35 कलाकारों की मेहनत से तैयार होता है करोड़ों के नोटों का श्रृंगार
मंदिर की सजावट का काम शरद पूर्णिमा से शुरू हो जाता है। करीब 35 कलाकारों की टीम कई दिनों की मेहनत के बाद नोटों की लड़ियां, वंदनवार और आकर्षक सजावट तैयार करती है।
इस दौरान नोटों को सुरक्षित रखने का भी विशेष ध्यान दिया जाता है। सजावट में पिन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। नोटों को पॉलीथिन में सुरक्षित रखकर धागे और सुई की मदद से पिरोया जाता है, ताकि आयोजन के बाद उन्हें बिना नुकसान भक्तों को वापस किया जा सके।



















