इन दिनों त्रिपुरा के राज्यपाल रमेश बैस छत्तीसगढ़ के प्रवास पर है। इस दौरान वे अनेक समाजिक कार्यक्रमों में शामिल हुए। वे छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के महाधिवेशन में भी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। ग्राम अल्दा में आयोजित इस महाधिवेशन के दौरान उनका ऐतिहासिक स्वागत किया गया। समाज के लोगों को रमेश बैस की कमी खल रही है। बैस के आने से समाज में भारी उत्साह और उमंग का माहौल था, क्योंकि बैस 37 वर्षों तक सांसद रहे है तो स्वाभाविक बात है कि जनता का उनके प्रति प्रेम और लगाव दिख रहा था। कुर्मी समाज के भीतर भी यह चर्चा जोरों पर है कि बैस के राजनीतिक अनुभवों का लाभ अब छत्त्तीसगढ़ के लोगों को भी मिलना चाहिये। आज 17 फरवरी को बलौदाबाजार में नागरिक अभिनंदन का आयोजन किया जा रहा है जिसमें तमाम राजनीतिक दल के पदाधिकारी, विभिन्न समाज के पदाधिकारी, व्यापारी वर्ग, पत्रकार वर्ग सहित विभिन्न संगठनों के सदस्यों के द्वारा उनका ऐतिहासिक स्वागत किया जायेगा। अब श्री बैस के छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान अब राजनीतिक जानकारों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या बैस आएंगे छत्तीसगढ़ में कमल खिलाएंगे…? जानकारों का कहना है कि छत्त्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की जो स्थिति है उसे सभी लोग जानते है। राजनीतिक हल्कों में ऐसी चर्चा है कि त्रिपुरा राज्यपाल रमेश बैस को हटाकर छत्तीसगढ़ लाया जा सकता है और राज्य में भाजपा की स्थिति मजबूत करने के साथ ही आने वाले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के रूप में पेश किया जा सकता है। प्राय: देखा जाता है कि जब-जब रमेश बैस छत्तीसगढ़ आते है तो सभी वर्गों के लोग उनसे मिलने पहुंचते है, इसके साथ भाजपा के पदाधिकारी एवं कार्यकर्तागण भी उनसे मिलने पहुंचते है और पार्टी की राज्य में वर्तमान स्थिति से अवगत कराते रहते है। राजनीतिक जानकारों के बीच यह भी चर्चा है कि मोतीलाल वोरा को 1993 में उत्तर प्रदेश् का राज्यपाल बनाया गया, राज्यपाल रहने के बाद 1998 में लोकसभा का चुनाव जीते, बाद में उन्हे कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। विश्वस्त सूत्रों द्वारा यह कयास लगाया जा रहा है कि पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व रमेश बैस को त्रिपुरा राज्यपाल के पद से हटा कर छत्तीसगढ़ भेजा जा सकता है। छत्तीसगढ़ राज्य के सह निर्माता 7 बार के लोकप्रिय सांसद छत्तीसगढिय़ा किसान पुत्र रमेश बैस 37 साल के राजनीतिक कैरियर में उन पर कोई दाग नहीं है, वे त्याग, तपस्या और बलिदान से भारतीय राजनीति का उदीयमान सितारा बने हुए हैं।
रमेश बैस का राजनीतिक सफरनामा
रमेश बैस 1978 में रायपुर नगर निगम के लिए चुने गये, 1980 से 84 तक मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य भी थे, फिर 1989 में रायपुर मध्यप्रदेश से 9 वीं लोकसभा के लिए चुने गये और 11वी, 12वीं, 13वीं, 14 वीं, 15वीं, 16वीं लोकसभा में फिर निर्वाचित हुए। उन्होंने भारत सरकार में केन्द्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया। अभी वर्तमान में त्रिपुरा के राज्यपाल है।

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