नई दिल्ली। देश में कोरोना के केस एक बार फिर बढ़ने लगे हैं। इस बीच वैज्ञानिकों ने अपने ताजा अध्ययन में एक और चिंताजनक खुलासा किया है। विज्ञानियों ने बताया है कि भारत में कोरोना के 5000 से अधिक स्वरूप यानी वैरिएंट पाए गए हैं। वैज्ञानिकों ने बताया है कि महामारी के दौरान ये नए वैरिएंट कैसे विकसित हुए। साथ ही एक बार फिर बताया गया है कि मास्क और दो गज की शारीरिक दूरी ही वायरस के प्रसार को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है। अध्ययन में बताया गया है कि कोई भी वायरस प्राकृतिक तौर पर म्यूटेट करते हैं यानी अपनी संरचना में बदलाव करते हैं। आमतौर पर वायरस में महीने में एक या दो बदलाव होता है। कोरोना वायरस में भी ऐसा हो रहा है। यह अध्ययन वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के कोशिका एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र (सीसीएमबी) के विज्ञानियों ने किया है। अध्ययन रिपोर्ट की प्रमुख लेखिका डॉ. सुरभि श्रीवास्तव हैं। पढ़िए अध्ययन से जुड़ी बड़ी बातें
- अध्ययन के मुताबिक, कोरोना वायरस (Coronavirus) का एक नया स्वरूप ए3आई था, जिसके धीमे प्रसार की बात कही गई थी। दुनियाभर में सबसे तेजी से वायरस का ए2ए वैरिएंट फैला। हाल ही में कई देशों में पाए गए Coronavirus के नए स्वरूप ने इसलिए चिंता बढ़ा दी थी, क्योंकि इसके स्पाइक प्रोटीन में बदलाव हुआ, जिससे चिपक कर वायरस मानव कोशिकाओं में पहुंचा।


















