स्वाधीनता दिवस पर वॉट्सएप ग्रुप ‘काव्यांगन’ का कवि-सम्मेलन
देश के जाने-माने कवि-कवयित्रियों ने किया काव्यपाठ
रायपुर। लोकप्रिय साहित्यिक वॉट्सएप ग्रुप ‘काव्यांगन’ के तत्वावधान में स्वाधीनता दिवस के मौके पर ऑनलाइन कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया। 15 अगस्त को शाम सात बजे से रात नौ बजे तक चले इस कवि-सम्मेलन में देश के जाने-माने कवियों और कवयित्रियों ने काव्य-पाठ करके देश-प्रेम की भावना को मजबूत किया। विशेष उल्लेखनीय बात यह है कि इस ग्रुप ने एक से चौदह अगस्त तक लगातार कार्यक्रम करके पहले अपने सदस्य कवियों-कवयित्रियों को उत्साहित किया, देश विषयक सृजन कराया, इसके बाद पंद्रह अगस्त को बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया। पंद्रह दिन तक लगातार चले कार्यक्रम में देश में व्याप्त समस्याओं पर चिंतन-मनन तथा देश में हुई अब प्रगति पर चर्चा की गई। प्रतिदिन अलग-अलग विषय देकर कार्यक्रम किए गए। जिन देश-भक्तों और शहीदों की बदौलत आजादी मिली, उनके त्याग और बलिदान को भी याद किया गया।
पंद्रह अगस्त के कवि-सम्मेलन की मुख्य-अतिथि देश की जानी-मानी कवयित्री डॉ. अंजना सिंह सेंगर (नोएडा) रहीं और अध्यक्षता आकाशवाणी, रायपुर के अवकाश प्राप्त कार्यक्रम अधिकारी और जाने-माने साहित्यकार डॉ. बृजेंद्र वैद्य (रायपुर, छत्तीसगढ़) ने की। विशिष्ट अतिथि सुप्रसिद्ध कवि रामलाल सिंह परिहार (नागौद, सतना) रहे। कार्यक्रम का संचालन जाने-माने कवि प्रदीप सेनगुप्ता (रायपुर) ने किया। समीक्षक वरिष्ठ साहित्यकार सीएस अकेला (उचेहरा, सतना) रहे। कार्यकम का मार्गदर्शन वरिष्ठ पत्रकार और दैनिक जागरण, मेरठ के संपादक जयप्रकाश पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सलाहकार मनोज झा (दिल्ली), वरिष्ठ साहित्यकार और वैज्ञानिक डॉ. सुशील कुमार शर्मा (नागपुर) और छत्तीसगढ़ के जाने-माने पत्रकार और साहित्यकार अरुण उपाध्याय (रायपुर) रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। मंच की सदस्य और जाने-मानी गायिका, कवयित्री दुर्गा प्रजापति (रायपुर) ने अपने मधुर स्वर से माता सरस्वती की वंदना की और कार्यक्रम को आरंभ में ही ऊंचाई पर पहुंचा दिया। इसके बाद मशहूर कवयित्री और गायिका पूनम दुबे (अंबिकापुर, छत्तीसगढ़) ने राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत कविता सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। अंबिकापुर की ही लोकप्रिय कवयित्री और लेखिका अनिता मंदिलवार सपना, आशा पांडेय और मन्शा शुक्ला ने मनभावन काव्य-पाठ किया। आप तीनों कवयित्रियों की कविताओं ने राष्ट्रीयता के स्वर मुखर किए। श्रोताओं ने आपके चिंतन और हुनर की सराहना की। इसी तरह लोकप्रिय युवा कवयित्री जयश्री त्रिवेदी (शहडोल) ने राष्ट्रीयता से ओतप्रोत रचना सुनाकर वाहवाही लूटी। सतना (मध्यप्रदेश) की तेजी से उभरती हुई कवयित्री और गायिका दीपा शुक्ला ने अपनी मधुर स्वर-लहरी से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। रायपुर की लोकप्रिय कवयित्री, लेखिका और समाजसेविका कशिश खनूजा ने देश की खुशहाली की कामना करते हुए उत्कृष्ट रचना पेश की। बस्तर की जानी-मानी कवयित्री नलिनी बाजपेयी ने अपनी चिंतन-प्रधान रचना से मंच को ऊंचाई प्रदान की। श्रोताओं ने आपकी रचना की भूरि-भूरि सराहना की।
उचेहरा (सतना) के कवि सीएस अकेला ने बघेली बोली और हिंदी में चिंतन-प्रधान रचना पेश की और मंच की धारा बदली।
ग्रुप के एडमिन वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और देश के जाने-माने कवि राजकुमार धर द्विवेदी (रायपुर) ने धरती-वंदना पेश की। भारत-भूमि की महिमा का बखान करते हुए आपने कहा-
‘अपनी माटी सोना-चांदी, हीरा-मोती चंदन है,
बारंबार नमन हे धरती, पूजन-अर्चन वंदन है।
मान बढ़ाए जो तेरा मां, वह ही सच्चा नंदन है,
मातृ-भूमि हे भारत माता, हे जननी अभिनंदन है।’
देश के तमाम बड़े मंचों पर धूम मंचों पर धूम मचाने वाली विख्यात कवयित्री और शायरा डॉ. दीपशिखा सागर (छिंदवाड़ा) ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। आपने उन शहीदों की याद में मार्मिक गीत पढ़ा, जिनकी बदौलत देश को आजादी मिली।
देश की जानी-मानी लेखिका और कवयित्री रंजना मिश्रा (कानपुर) ने अपने मधुर स्वर में वीर सिपाही पर, देश-प्रेम जागृत करता हुआ बेहतरीन गीत प्रस्तुत किया, जिसकी श्रोताओं ने भूरि-भूरि सराहना की। बानगी देखिए-
‘ले देश-प्रेम का जज्बा वो, चल पड़ा अमर एक राही है,
भारत की मिट्टी में जन्मा, ये तो एक वीर सिपाही है।
उन मात-पिता को नमन बहुत, जिनने है ऐसा वीर जना, और सौंप दिया है भारत को, अपने हृदय को धीर बना।’
रंजना जी का एक और गीत देखें-
‘वीरता से तुम भरे, न शत्रु से कभी डरे,
तुम देश के लिए जीए और देश के लिए मरे।
भृकुटियां तनी हुई हैं,भाल ये विशाल है,
धन्य है मां भारती, जो तेरे जैसा लाल है।’
कार्यक्रम के सफल संचालक प्रदीप सेनगुप्ता ने बेहतरीन काव्य-पाठ किया। आपकी रचना की बानगी देखें-
‘आजादी का गहना गहने,
हमने हर बलिदान हैं सहने,
खोया अपने ही रत्नों को,
और सजाया रोती रातों को,
जर्रे जर्रे आंसू से सींचे,
आजादी फिर हमने पहने,
है अनमोल, कीमत हमने बड़ी चुकाई,
खुद को खोया, तुमको पाई,
करेंगे काम, समझो अब भाई,
व्यर्थ न जाये, लंबी लड़ाई,
मंजिल नजदीक, आओ मिताई,
बनने विश्वगुरु, बेला अब आई…
बनने विश्वगुरु, बेला अब आई….!’
देश के विख्यात कवि, लेखक, वक्ता और प्राचार्य तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार समेत अनेक पुरस्कारों से सम्मानित विभूति प्रो. शरद नारायण खरे (मण्डला) ने देश-प्रेम से भरी एक-से-बढ़कर एक रचनाएं सुनाईं और मंच को अपनी मौजूदगी से गरिमा प्रदान की। श्रोताओं ने आपकी भूरि-भूरि सराहना की।
अतिथियों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए सभी का मनोबल बढ़ाया। अध्यक्ष डॉ. बृजेंद्र वैद्य ने कहा-
‘आयोजन की परिकल्पना बहुत ही
सुंदर। पूरा सप्ताह मन मोहक रहा, बधाई ।
आज के कवि सम्मेलन
में प्रतिभागियों का स्वागत एवं शुभकामनाएं।’
इसी तरह विशिष्ट अतिथि रामलाल सिंह परिहार जी ने भी अपने विचार व्यक्त किए और सबका मनोबल बढ़ाया।
कार्यक्रम के मार्गदर्शक डॉ. सुशील कुमार शर्मा ने भी सभी का मनोबल बढ़ाया और कार्यक्रम की मुक्तकंठ से सराहना की। इसी तरह अरुण उपाध्याय जी ने भी स्नेह प्रदान किया।
मुख्य-अतिथि डॉ. अंजना सिंह सेंगर ने अपने भेजे संदेश में सभी को स्वाधीनता दिवस की हार्दिक बधाई दी तथा कहा कि साहित्यकार ऐसा सृजन करें कि देश के लोगों को दिशा मिले और प्रगति हो। आजादी की लड़ाई में साहित्यकारों का बड़ा योगदान रहा। उन्होंने लोगों में देश-प्रेम की भावना जागृत करने में महती भूमिका निभाई।
अंत में आभार-प्रदर्शन मंच के एडमिन राजकुमार धर द्विवेदी ने किया।


















