आज 29 जुलाई को अनूप जलोटा का जन्मदिन है। एक मुलाकात के दौरान उन्होंने बताया कि मेरे जन्म की रोचक कहानी की तरह ही मेरी शादी की कहानी भी बहुत रोचक है। प्रसिद्ध अभिनेता जय मुखर्जी की पत्नी नीलम मुखर्जी मेरी अच्छी मित्र हैं। जय मुखर्जी मेरे संगीत को बहुत पसंद करते थे। इस कारण पूरे परिवार से मेरे अच्छे संबंध हैं। लगभग 22 साल पहले नीलम जी मेरे घर पर डिनर पर आईं। मेरे पिता जी से उन्होंने ढेर सारी बातें की, और उसके बाद उन्होंने मेरे पिताजी से मेरे बारे में पूछा। मैंने चर्चा के दौरान नीलम जी से पूछा आप इतनी फिट कैसे रहती है ? तो वे बोलीं, मैं सुबह-सुबह जुलू चौपाटी पर जॉगिंग के लिए जाती हूं। तो मैंने पूछा आप अकेली ही चौपाटी पर जाती है या कोई और आपके साथ होता है, इस पर नीलम जी ने उत्तर दिया मेरे साथ एक सहेली मेघा भी रहती है। मैंने उत्सुकता से पूछा कौन मेघा, जो शेखर कपूर की पत्नी और पंडित जसराज की शिष्या हैं। मेरी बातें सुनकर नीलम जी को इस बात का पता चल गया था कि मैं मेघा को जानता हूं। नीलम मुखर्जी ने कहा मेधा शेखर कपूर की पत्नी जरुर है, पर उनके बीच कुछ अच्छा नहीं चल रहो है, वे इन दिनों शेखर कपूर के साथ नहीं रह रही है। चूंकि मैं पहले ही मेधा से मिल चुका था और यह भी जानता था कि मेधा अब शेखर के साथ नहीं रहना चाहती, लिहाजा मैंने मेधा को अपनी जीवन संगिनी बनाने का निश्चय कर लिया। मुझे इस बात का एहसास हो चुका था कि मेधा मेरी जीवनसंगिनी बन सकती हैं। मैंने नीलम से मेधा का टेलीफोन नंबर लिया और नीलम के जाने के बाद रात करीब 11 बजे मेधा को फोन कर दिया। देर रात फोन करना मेधा को अच्छा नहीं लगा, क्योंकि मेधा से मेरी ऐसी कोई जान पहचान नहीं थी कि रात 11 बजे फोन कर सकूं। मैंने मेधा से कहा कि कल मेरे साथ लंच पर आओ। यह बात भी मेधा को अच्छी नहीं लगी। अगले मैंने फिर मेधा को फोन किया और उसे लंच पर आने के लिए मना लिया और तय समय पर मेधा मेरे घर लंच के लिए पहुंच गई। दोपहर एक बजे मेधा मेरे घर आई और हम दोनों घंटों बातें करते रहे। मेधा को भूख लगी है, इसका अहसास होते ही मैंने बगैर देर किये मेधा के समक्ष बड़ी हिम्मत जुटाते हुए विवाह का प्रस्ताव रखा। मेधा के सामने अचानक शादी का प्रस्ताव रख जाने से मेधा हक्की-बक्की रह गई, उसने प्रस्ताव पर विचार करने के लिए समय मांगा। कई लोगों से मेरे बारे में जानकारी प्राप्त की और दसवें दिन उसने शादी के लिए हां कर दी और अगस्त माह में मेधा और मेरी लंदन में शादी हो गई। अगस्त माह में मुझे एक कार्यक्रम के सिलसिले में लंदन जाना था, मैंने मेधा से पूछा मेरे साथ लंदन चलोगी, पहले तो उसने संकोच किया फिर मैंने कहा कि तुमने शादी का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है, तो क्यों न हम लंदन में जाकर शादी कर लें। शादी के बाद हम दोनों मीरपुरी तथा वडगामा परिवारों से आशीर्वाद लेने गए। दोनों परिवार से मिले आशीर्वाद आशीर्वाद के कारण मेरा व मेधा का वैवाहिक जीवन शुरु हुआ। विवाह के बाद मुझे एक पुत्र की प्राप्ती हुई, जिसका नाम मैंने तथा मेधा ने आर्यमन रखा, अब वह 22 साल का है और अमेरिका के किंगस्टन विश्वविद्यालय का छात्र है।

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