किसानों को समितियों से रासायनिक खाद ऋण के रूप में मिलता है। इसके बावजूद वर्मी कम्पोस्ट लेना भी अनिवार्य है। हैरत की बात यह है कि खरीफ सीजन खत्म होने के बाद जहां रबी की फसल ली ही नहीं जाती, वहां भी वर्मी कम्पोस्ट बेचा जा रहा है। रायगढ़ और जशपुर जिलों ने कमाल कर दिया है। बिना जरूरत के भी किसानों को एक करोड़ का कम्पोस्ट बेच डाला है। एक ओर सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए धान क़ा समर्थन मूल्य बढ़ा रही है, दूसरी ओर वर्मी कम्पोस्ट के नाम पर गोबर का चूरा खरीदने का बोझ डाल रही है। एक ओर किसान प्रोत्साहन राशि पाता है, तो उसका आधा वर्मी कम्पोस्ट के नाम पर उससे वापस ले लिया जाता है। रायगढ़ और जशपुर दोनों जिलों में अंधेर मचा हुआ है। खरीफ सीजन में पूरी कृषि भूमि पर खेती होती है। लेकिन रबी में केवल सिंचित भूमि पर ही कुछ फसलें लगाई जाती हैं।

हैरानी की बात है कि रबी में फसल आच्छादन नहीं होने के बावजूद समितियों से किसानों को एक करोड़ से ज्यादा का वर्मी कम्पोस्ट बेचा जा चुका है। जशपुर में तो दो फसली जमीन बहुत कम है। रायगढ़ की तुलना में जशपुर में रबी की फसल का आच्छादन बहुत कम है। इसके बावजूद रायगढ़ से ज्यादा वर्मी कम्पोस्ट वहां बेच दिया गया। एक अक्टूबर से 31 दिसंबर 2022 के बीच आंकड़ों की बात करें तो रायगढ़ में 9988 किसानों को 4660 क्विं. वर्मी कम्पोस्ट बेचा गया है, जिसके एवज में 46.60 लाख रुपए किसानों से वसूले गए हैं।

इसमें नकद और वस्तु ऋण के रूप में विक्रय हुआ है। सारंगढ़ और बरमकेला ब्लॉक में 263 किसानों को 5.74 लाख का वर्मी कम्पोस्ट बेच दिया गया। जशपुर में तो कमाल ही हो गया। रायगढ़ से भी रबी आच्छादन कम होने के बावजूद वहां 6242 किसानों को जबर्दस्ती 67.59 लाख का कम्पोस्ट विक्रय किया जा चुका है। ज्यादातर किसानों से नकद राशि ली गई है।

मिट्टी पर कोई असर नहीं – जितने भी गौठान हैं, उनमें से एक में भी वास्तविक वर्मी कम्पोस्ट नहीं बनाया गया। केवल गोबर को वर्मी टांके में डाला गया। महीनों तक पड़े रहने के कारण गोबर सूख चुका है। इसे बोरों में पैकिंग कर किसानों को दस रुपए किलो की दर से लेने को मजबूर किया जा रहा है। जशपुर और रायगढ़ में उन ब्लॉकों में भी किसानों को कम्पोस्ट बेचा गया है, जहां सिंचाई के साधन ही नहीं हैं। खाद के नाम पर बेचे जा रहे सूखे गोबर से मिट्टी पर कोई असर ही नहीं हो रहा है।

गौठानों से भेजी मतलब समिति के खाते में चढ़ा – दरअसल गौठानों में गोबर खरीदी के नाम पर करोड़ों का भुगतान किया जा चुका है। अब इस राशि को सही साबित करने के लिए वर्मी कम्पोस्ट बेचकर एडजस्ट किया जा रहा है। गौठानों से समिति को बिना मांगे ही वर्मी कम्पोस्ट भेज दिया जाता है और इसे लोन एकाउंट में चढ़ा दिया जाता है। ऐसी स्थिति में समिति से विक्रय हो या न हो, राशि समिति के खाते से वसूल ली जाती है। जबर्दस्ती इस योजना को सफल बताने के लिए आंकड़े दिखाए जाते हैं।

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