Author: NEWSDESK

आजमगढ़। अखिल भारतीय कूर्मि क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सर्वेश कटियार आज कूर्मि क्षत्रिय अन्नदाता रथयात्रा के साथ आजमगढ़ पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। रानी…

राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण , जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण एवम विकासखण्ड साक्षरता मिशन प्राधिकरण के मार्गदर्शन में 30 सितंबर 2021 दिन गुरुवार को ” पढ़ना लिखना…

रायपुर। छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के केन्द्रीय अध्यक्ष एवं राजप्रधान पद के लिए चुनाव की तिथि 31 अक्टूबर घोषित कर दी गई है। आपको बता…

कोरबा। विकासखण्ड कटघोरा के अंतर्गत ग्राम पंचायत चाकाबुड़ा की रहने वाली सुश्री फूलबाई कश्यप स्वावलंबन की दिशा में उदाहरण पेश कर रही हैं। बैंक सखी फूलबाई के कारण लगभग छह गांवो के ग्रामीणों को बैकिंग सेवाएं घर पहुंच मिल रही है। पैर से दिव्यांग होने के बावबजूद फूलबाई के आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़े होने में उनकी दिव्यांगता बाधा नहीं बन सकी है। स्नातक की पढ़ाई पूरी कर चुकी फूलबाई ने बैंक सखी बनकर लोंगों को परिजनों की भविष्य सुरक्षा के लिए बैंको के माध्यम से बीमा कराने की भी सलाह दे रहीं हैं और उनका बीमा भी करा रहीं हैं। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा के साथ-साथ राशि जमा करने, निकालने और पेंशन तथा मजदूरी भुगतान का काम भी फूलबाई घर-घर जाकर कर रहीं हैं। विकासखण्ड कटघोरा के गांव जवाली, कसईपाली, चाकाबुड़ा सलिहापारा एवं डुलहीकछार के ग्रामीणों को पेंशन, मजदूरी और बैंक खातों से रकम निकालने के लिए बैंक का चक्कर नहीं लगाना पड़ता है। चाकाबुड़ा और आसपास गांव के लोगों, दिव्यांगजनों और वृद्धजनों को पेंशन लेने के लिए बैंक जाने से भी राहत मिल गई है। बैंक सखी फूलबाई गांव में लगभग 200 बचत खातों का संचालन कर हितग्राहियों को घर पहुंच राशि का भुगतान कर रही हैं। बैंक सखी का काम करने के साथ-साथ फूलबाई छोटे स्टेशनरी स्टोर का भी संचालन कर रहीं हैं। अपने दुकान के माध्यम से पेन, कॉपी और बच्चों को खाने की चीजों की भी बिक्री कर रही है। फूलबाई का हौसला इतने में ही नहीं थमता। महिला स्व सहायता समूह से जुड़कर कोसा धागाकरण का काम भी फूलबाई जोर-शोर से कर रही है। बैंक सखी के काम के साथ कोसा धागाकरण के काम से फूलबाई को अच्छी आर्थिक लाभ हो रही है। दिव्यांग होने के बावजूद आर्थिक लाभ कमाकर अपने माता-पिता को आर्थिक सहयोग करने में हाथ बंटा रही है।सुश्री फूलबाई कश्यप ने बताया कि उनके दो भाई और एक बहन हैं। माता-पिता कृषि का काम करते हैं। फूलबाई दो वर्षों से बैंक सखी के रूप में काम कर रही हैं। बी.ए. फाइनल की पढ़ाई कर चुकी फूलबाई ने गांव की महिलाओं के साथ खुशी स्वसहायता समूह में जुड़कर बैंक सखी का काम शुरू किया। समूह की महिलाओं के बीच पढ़ी-लिखी होने के कारण फूलबाई ने बैंक सखी के काम के साथ समूह की अन्य महिलाओं को स्वरोजगार के लिए जागरूक करने का भी काम किया। खुशी स्वसहायता समूह की महिलाएं ककून बैंक से कोसा प्राप्त करके घर के काम के साथ, कोसा धागाकरण का भी काम करती हैं। समूह की महिलाएं कोसा धागा निकालकर औसतन तीन से चार हजार रूपए मासिक आय अर्जित कर रही हैं।बैंक सखी फूलबाई दो वर्षों में लगभग 86 लाख रूपए का लेन-देन कर चुकी हैं। इसमें 80 लाख रूपए की निकासी और छह लाख रूपए की जमा राशि शामिल है। फूलबाई ग्रामीणों के लगभग 200 बैंक खाते भी गांव में ही खोल चुकी हैं। बैंक सखी फूलबाई बैंक खातों के संचालन के साथ-साथ लोगों के विभिन्न प्रकार के शासकीय बीमा करने में भी सक्रिय है। फूलबाई प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा के 13, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा के दस, अटल पेंशन योजना के दो और दुर्घटना बीमा के अंतर्गत 11 लोगों का बीमा कर चुकी हैं। फूलबाई को बैंक सखी के रूप में कार्य करने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बिहान की तरफ से 33 हजार रूपए की राशि प्राप्त हुई है। फूलबाई को बैंक सखी कमीशन के रूप में बैंक द्वारा 18 हजार 600 रूपए भी प्राप्त हुआ है।

बिलासपुर। श्रीमती माधुरी धुरी के जीवन की धुरी पहले उसके घर एवं परिवार तक सीमित थी। बाहरी दुनिया से उसका नाता नही था लेकिन जब से…

रायपुर। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप छत्तीसगढ़ राज्य में स्कूली बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने वाली शिक्षा प्रदान करने की…

जगदलपुर।आदिवासी बाहुल्य बस्तर जिले के तोकापाल विकासखण्ड के केशलूर सेक्टर के अन्तर्गत आंगनबाड़ी केन्द्र एरण्डवाल की सुपोषण वाटिका एक आदर्श सुपोषण वाटिका बनकर छत्तीसगढ़ सरकार के सुपोषण मुक्ति अभियान के परिकल्पना को साकार करने में महत्वपूर्णं योगदान दे रहा है। आंगनबाड़ी केन्द्र एरण्डवाल की यह सुपोषण वाटिका पौष्टिक खाद पदार्थों की सुगम उपलब्धता के स्थान बनने के अलावा हरी-भरी साग-सब्जी और फलदार वृक्षों के कारण लोगों को पर्यावरण सुरक्षा का भी संदेश दे रहा है। इस सुपोषण वाटिका से आंगनबाड़ी केन्द्र एरण्डवाल के नन्हें-मुन्हें बच्चों के अलावा ग्राम एरण्डवाल की गर्भवती माताओं को भी ताजी हरी-भरी सब्जी के रूप में पौष्टिक भोजन मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य को कुपोषण से मुक्ति दिलाना भूपेश बघेल के नेतृत्व वाले छत्तीसगढ़ सरकार की विशेष प्राथमिकता में शामिल है। राज्य शासन के इस कार्य को कलेक्टर श्री रजत बंसल के मार्गदर्शन में बस्तर जिले को कुपोषण मुक्त बनाने तथा सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों को आदर्श आंगनबाड़ी केन्द्र के रूप में विकसित करने हेतु तेजी से कार्य किए जा रहे हैं।आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों के सहयोग से जुलाई 2019 से बनाए गए आंगनबाड़ी केन्द्र एरण्डवाल के इस सुपोषण वाटिका में पोषणयुक्त हरी-भरी सब्जियों की समुचित उपलब्धता एवं हरियाली के कारण लोगों के लिए आकर्षण का भी केन्द्र बन गया है। इस आंगनबाड़ी केन्द्र की कार्यकर्ता श्रीमती सुशीला ठाकुर, एवं साहायिका श्रीमती सामबती मौर्य ने बताया कि इस कुपोषण वाटिका के निर्माण के पूर्व उन्हें आंगनबाड़ी केन्द्र के बच्चों एवं गर्भवती माताओं के लिए ताजी हरी-भरी सब्जियों की व्यवस्था के लिए बाजार एवं सब्जी उत्पादन करने वाले किसानों के पास जाना पड़ता था। लेकिन हमारे आंगनबाड़ी केन्द्र में पोषण वाटिका के निर्माण से जरूरत के हिसाब से लगभग पूरी मात्रा में ताजी हरी सब्जियां आसानी से मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि हमारे इस पोषण वाटिका केन्द्र में सेम, कद्दू, पपीता, लौकी, बरबट्टी आदि के अलावा भाजियां भी उगाई गई है। इसके अलावा आंगनबाड़ी केन्द्रों में और भी सब्जियां एवं पौधे लगाए जाने की भी योजना है। इस पोषण वाटिका से जरूरत के हिसाब से पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक साग-सब्जी मिलने से सब्जियों की व्यवस्थाओं के लिए बाजार एवं अन्य सब्जी विक्रताओं के पास बहुत ही कम जाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस आंगनबाड़ी केन्द्र के सुपोषण वाटिका को उत्कृष्ट सुपोषण वाटिका के रूप में सम्मानित भी किया जा चूका है।इस आंगनबाड़ी केन्द्र के सुपोषण वाटिका की सराहना आंगनबाड़ी केन्द्र में पौष्टिक भोजन करने के लिए आने वाले गर्भवती माता लक्ष्मी, शांति एवं सुधनी ने भी की है। उन्होंने कहा कि हम सभी गर्भवती माताओं को पौष्टिक भोजन के साथ आंगनबाड़ी केन्द्र एरण्डवाल के सुपोषण वाटिका की ताजी सब्जियां भी प्रदान की जा रही है। इन महिलाओं ने बताया कि इस सुपोषण वाटिका की सब्जियां बहुत ही स्वादिष्ट हैं। इस प्रकार से आंगनबाड़ी केन्द्र एरण्डवाल की सुपोषण वाटिका एक आदर्श सुपोषण वाटिका बनकर हमारे नौनिहालों की सुरक्षा के साथ-साथ राज्य सरकार की कुपोषण मुक्ति अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्णं भूमिका निभा रहा है।

कोरबा। जिले के शहरी क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों को कच्चे और झोपड़पट्टी के मकानों में रहने की मजबूरी खत्म हो रही है। शासन की महत्वाकांक्षी मोर जमीन-मोर मकान योजना अंतर्गत शहरी क्षेत्र के गरीब लोगों को पक्के मकान में रहने की सुविधा मिल रही हैं। नगर पालिका परिषद कटघोरा के वार्ड क्रमांक 13 में निवास करने वाले श्री हरीश चंद्र पटेल को अपने पुराने कच्चे मकान से छुटकारा मिल गया है। शासकीय योजना के सहयोग से हरिशचंद्र और उनके परिवार को पक्के मकान में रहने का लाभ मिल पा रहा है। गरीबी स्थिति के साथ जीवन यापन करने और मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करने वाले हरिशचंद्र के लिए पक्के मकान की सोच बहुत दूर की बात थी। खराब आर्थिक स्थिति हरिश्चंद्र को कच्चे मकान में रहने को मजबूर करता था। कच्चे मकान में बारिश के मौसम में पानी भरने और जगह-जगह दरारों से पानी आने की समस्या से भी जूझना पड़ता था। कच्चेे मकान के टूटी दीवारों से सांप बिच्छूओं के आने का भी खतरा सताता रहता था। हरिशचंद्र के मन में पक्का मकान बनाने और परिवार को रहने लायक अच्छा आवास देने की सोच तो आती थी, लेकिन खराब आर्थिक स्थिति मकान बनाने के लिए पैसा लगा पाने की इजाजत नहीं देती थी। पक्का मकान उनके लिए एक सपना जैसा हो गया था।शासकीय विभागों से श्री हरीशचंद्र पटेल को शासन द्वारा पक्के आवास बनाकर देने वाली योजना के बारे में जानकारी मिली। नए मकान बनने की योजना सुनकर हरिश्चंद्र के मन में पक्के मकान में रहने की उम्मीद जगी। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी अंतर्गत मोर जमीन-मोर मकान योजना के तहत आवास निर्माण के लिए आवेदन किया। आवेदन करने के पश्चात कुछ दिनों में हरिशचंद्र के लिए पक्का मकान बनाने की स्वीकृति भी विभाग में मिल गई। शासकीय योजना के तहत हरिश्चंद्र के पक्के मकान का निर्माण किया गया। गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले हरिशचंद्र को सर्वसुविधा युक्त आवास प्राप्त होने पर उनके सामाजिक मान-सम्मान में भी वृद्धि हो गई। पक्का मकान मिलने से हरिशचंद्र और उनके परिवार को बरसात के समय कच्चे छप्पर से पानी टपकने जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है। पक्के मकान के बन जाने से हरिशचंद्र और उनके परिवार को मिट्टी के मकान में रहने से आजादी भी मिल गई है। गरीब लोगों को पक्का मकान बनाकर देने की इस योजना से हरिशचंद्र काफी खुश है और पूरे परिवार सहित शासन का आभार प्रकट करते हैं।मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पालिका परिषद कटघोरा ने बताया कि नगरपालिका कटघोरा क्षेत्र अंतर्गत मोर जमीन-मोर मकान योजना के तहत कुल 884 आवास स्वीकृत हुआ है। स्वीकृत आवासों में से 552 आवासों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है तथा 151 आवासों का निर्माण प्रगतिरत है। शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत शहरी क्षेत्र में गरीब लोगों को पहले से निवासरत् जगह पर ही उनके कच्चे मकान के बदले  पक्का मकान बना कर दिया जा रहा है। शासन की योजना से गरीब लोगों को झोपड़ पट्टियों या कच्चे मकान में रहने से आजादी मिल रही है।

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