डेस्क। ऑनलाइन शॉपिंग का क्रेज जितना बढ़ा है, उतनी ही तेजी से शातिर ठगों ने हमारे ‘डिलीवरी बॉक्स’ को अपना नया हथियार बना लिया है। ई-कॉमर्स की दुनिया में अब खतरा केवल ‘गलत सामान’ मिलने का नहीं, बल्कि एक ‘गलत ओटीपी’ से आपका बैंक खाता खाली होने का भी है।
आजकल ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जहाँ अपराधी खुद को फ्लिपकार्ट या अमेजॉन का डिलीवरी एजेंट बताकर लोगों के घर पहुँच रहे हैं। इनका तरीका बड़ा सीधा लेकिन खतरनाक है। ये फर्जी एजेंट किसी न किसी बहाने से आपसे आपके मोबाइल पर आया OTP (वन टाइम पासवर्ड) माँगते हैं। जैसे ही आप उन्हें यह कोड बताते हैं, वे आपकी बैंकिंग जानकारी या पर्सनल डेटा तक पहुँच बनाकर आपकी जमा-पूंजी पर हाथ साफ कर देते हैं।
हालाँकि, कंपनियों ने सुरक्षा के लिए खुद ‘ओटीपी-बेस्ड डिलीवरी’ शुरू की है, लेकिन ठग इसी सुरक्षा फीचर को भ्रम का जाल बनाकर इस्तेमाल कर रहे हैं।
जालसाज अक्सर उन पैकेजों का हवाला देते हैं जो आपने शायद कभी बुक ही नहीं किए होते। वे इसे ‘कैंसिलेशन’ या ‘वेरिफिकेशन’ की प्रक्रिया बताकर आपसे ओटीपी की मांग करते हैं। कभी-कभी वे तकनीकी खामी का बहाना बनाकर आपके फोन पर लिंक भेजते हैं, जो वास्तव में एक मालवेयर या फिशिंग साइट होती है।
सुरक्षा कवच: इन 5 बातों का रखें खास ख्याल
साइबर क्राइम एक्सपर्ट्स और पुलिस प्रशासन (जैसे डीआईजी साइबर क्राइम रोहित मालपानी) ने इस बढ़ते खतरे को देखते हुए कुछ कड़े सुरक्षा सुझाव साझा किए हैं।
अजनबी पर भरोसा न करें: किसी भी संदिग्ध डिलीवरी एजेंट के साथ अपना ओटीपी कभी साझा न करें। असली डिलीवरी ओटीपी तभी दें जब आप सुनिश्चित हों कि सामान आपने ही मंगाया है।
पहचान की पुष्टि: आपके दरवाजे पर खड़े व्यक्ति की आईडी और कंपनी की साख को अच्छी तरह जांच लें।
पहले जांचें, फिर भुगतान: पार्सल स्वीकार करने या पेमेंट करने से पहले पैकेट को खोलकर देख लें कि अंदर वही सामान है जिसका आपने ऑर्डर दिया था।
वेरिफाइड गेटवे का उपयोग: भुगतान के लिए हमेशा सुरक्षित और आधिकारिक डिजिटल पेमेंट ऐप्स का ही इस्तेमाल करें। किसी अनजाने लिंक पर क्लिक करके पेमेंट न करें।
ऑर्डर हिस्ट्री चेक करें: कोई भी पार्सल लेने से पहले अपने शॉपिंग ऐप में ‘माय ऑर्डर्स’ सेक्शन में जाकर स्टेटस जरूर देख लें।














