अमरावती/नई दिल्ली: 2024 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव के दो साल बाद उस दौर में हुए भारी मतदान पर अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की तरफ से संशोधित किए वोटिंग प्रतिशत पर हैरानी जताई। परकला प्रभाकर ने दावा किया कि आंध्र चुनाव में लगभग 4.16 प्रतिशत वोट रात 11:45 बजे से सुबह 2 बजे के बीच डाले गए। ये वोट टीडीपी-बीजेपी और जनसेना को मिले। दिल्ली के प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंकड़ों का हिसाब देते हुए उन्होंने कहा कि आधी रात के बाद लगभग 17 लाख वोट डाले गए। 3500 बूथों पर वोटिंग सुबह 2 बजे तक जारी रही। बता दें कि परकला प्रभाकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन के पति हैं।
आंध्र प्रदेश में बदले वोटिंग प्रतिशत पर सवाल
आंध्र प्रदेश चुनाव में चंद्राबाबू नायडू की टीडीपी ने 135, पवन कल्याण की जेएसपी ने 21 और बीजेपी ने 8 सीटें जीती थीं। जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को 11 सीटें मिली थी। चुनाव में 81.86 प्रतिशत मतदान हुआ था। अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर ने वोटिंग के 36 घंटे बाद बदले वोटिंग प्रतिशत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 13 मई 2024 को शाम 5 बजे वोटिंग खत्म होने के बाद आंध्र के मुख्य चुनाव अधिकारी ने 68.04 प्रतिशत वोटिंग की जानकारी दी थी। निर्वाचन आयोग ने रात 8 बजे जारी प्रेस रिलीज़ में 68.12 प्रतिशत मतदान होने की बात कही। फिर रात 11.45 बजे निर्वाचन आयोग ने 76.50 फीसदी वोटिंग का संशोधित आंकड़ा जारी किया। चार दिन बाद जारी किए गए अंतिम आंकड़ों में वोटिंग का आंकड़ा 81.79 फीसदी हो गया।
दावा, देर रात हर 20 सेकेंड में डाला गया एक वोट
परकला प्रभाकर ने दावा किया कि डेटा के आधार पर ऐसा लगता है कि कुल वोटों में से लगभग 4.16 फीसदी यानी 17 लाख ज्यादा वोट रात 11:45 बजे से सुबह 2 बजे के बीच डाले गए। उन्होंने कहा कि रात 8 बजे से सुबह 2 बजे के बीच लगभग 52 लाख वोट दर्ज किए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि आधी रात के बाद हर 20 सेकंड में एक वोट डाला जा रहा था, जबकि ईवीएम को रीसेट होने में 14 सेकेंड लगते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि फॉर्म 17-सी को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि वोटिंग के समय के बाद लाइन में खड़े वोटरों का कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं होता और न ही बूथ-स्तर के डेटा तक रियल-टाइम पहुंच होती है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने भी चुनाव रिकॉर्ड जैसे फॉर्म 17-सी और फॉर्म 20 पोलिंग के तुरंत जारी करने की मांग की।



















