कोच्चि : पालक्काड के रमेश पिशारोडी से लेकर तिरुवनंतपुरम के सुधीर करमना और त्रिपुनिथुरा की अंजलि नायर तक, फ़िल्मों से जुड़े कई कलाकार और अन्य लोग राज्य चुनाव लड़ रहे हैं। रियलिटी शो के सितारे और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी चुनावी मैदान में हैं। केरल में आमतौर पर फ़िल्मी सितारों को जनप्रतिनिधि के तौर पर ज़्यादा पसंद नहीं किया जाता, लेकिन इस बार पार्टियों-खासकर BJP और उसकी सहयोगी पार्टी Twenty20 ने पूरे भरोसे के साथ उनमें से कई लोगों को मैदान में उतारा है। ऐसा सिर्फ़ उनकी ‘स्टार वैल्यू’ (लोकप्रियता) के लिए ही नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक रुख़ के लिए भी किया गया है।
इनमें सबसे मशहूर नाम गणेश कुमार का है। गणेश कुमार पथानापुरम से छठी बार चुनाव जीतने की उम्मीद कर रहे हैं। वह कई सालों से पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय हैं और परिवहन मंत्री के तौर पर उनके काम से भी उनके जीतने की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है।
चुनावी मैदान में ये प्रमुख सिलेब्रिटी
केरल चुनाव में LDF ने तिरुवनंतपुरम में दिवंगत करमना जनार्दनन नायर के बेटे सुधीर को मैदान में उतारा है, और वह उनकी लोकप्रियता के साथ-साथ उनके राजनीतिक बैकग्राउंड पर भी भरोसा कर रही है। अन्य प्रमुख नामों में अभिनेता-निर्माता मेजर रवि (ओट्टापलम), रियलिटी शो से मशहूर हुए अखिल मारार (त्रिक्काकारा) और रॉबिन राधाकृष्णन (कुंडारा), पार्श्व गायिका दलीमा जोजो (अरूर), अभिनेता जिबी अब्राहम (पिरावोम), सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्रोमी कुरियाकोस (अंगमाली) और कवि-पटकथा लेखक अलानकोड लीलाकृष्णन (त्रिशूर) शामिल हैं।
आम नेताओं की अपेक्षा ज्यादा भीड़
पिशारोडी और अंजलि नायर जैसे उम्मीदवार जहां भी जाते हैं, वहां काफ़ी भीड़ और लोगों का प्यार पाते हैं। यह किसी आम राजनेता के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा होता है। इन उम्मीदवारों को मैदान में उतारने वाली पार्टियों का मानना है कि इनकी लोकप्रियता युवाओं के वोटों को उनके पक्ष में मोड़ने में मददगार साबित होगी। कांग्रेस के सोशल मीडिया समन्वयक पी.एम. नियास ने कहा कि अभिनेताओं को चुनाव में उतारना फ़ायदेमंद होता है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि लोग इन मशहूर हस्तियों को ही वोट देंगे।
क्या बोले इतिहासकार
लेखक और इतिहासकार एम.जी. शशिभूषण ने कहा कि केरल चुनाव प्रचारके लिए बहुत कम समय होने के कारण, इस चुनाव में पार्टियों का पूरा ज़ोर किसी भी क़ीमत पर जीत हासिल करने पर है। उन्होंने कहा कि पार्टियों को ऐसे उम्मीदवार चाहिए थे जिनसे लोग पहले से परिचित हों। यही वजह है कि उन्होंने अभिनेताओं, टीवी सीरियल के कलाकारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों को चुनाव में उतारा है।
पुरानी राजनीति से बहुत अलग है अब की सियासत
विरासत के शौकीन राजशेखरन नायर ने कहा कि पहले के समय में, पार्टियां चुनावों को उन लोगों को सम्मानित करने और उनका इनाम देने के एक अवसर के तौर पर इस्तेमाल करती थीं, जिन्होंने ज़मीनी स्तर पर काम किया था और पार्टी के लिए त्याग किए थे। अब यह सब सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर चल रहा है।
राजनीतिक रूप से जागरूक लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं को लगता है कि पार्टी के काम का कोई अनुभव न रखने वाले अभिनेताओं को चुनाव में उतारने से जीतने की संभावना कम हो सकती है। यह आलोचना भी हो रही है कि ऐसे उम्मीदवार कट्टर राजनेताओं के पक्ष में सीटें दिलाने में मदद कर सकते हैं। निर्देशक रामू करियात से लेकर अभिनेता सुरेश गोपी तक, फिल्म जगत के लोगों का चुनावी मैदान में उतरना केरल के लिए कोई नई बात नहीं है। लेकिन सुपरस्टार हमेशा चुनाव लड़ने से दूर ही रहे, हालांकि प्रेम नज़ीर ने कांग्रेस के लिए प्रचार किया था। उस समय लोग शोहरत के बजाय राजनीति पर ज़्यादा ध्यान देते थे। अब यह चलन बदलता हुआ दिख रहा है।



















