राजस्थान में जल जीवन मिशन से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिटायर्ड IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है. लंबे समय से फरार चल रहे अग्रवाल को आखिरकार दिल्ली से पकड़कर जयपुर लाया गया. इस गिरफ्तारी को इस पूरे मामले में अहम कड़ी माना जा रहा है.
सुबोध अग्रवाल राजस्थान में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी रैंक के अफसर थे और तमाम महत्वपूर्ण पदों पर रहकर कुछ दिनों पहले ही रिटायर्ड हुए हैं. इस घोटाले में राज्य के जलदाय विभाग के पूर्व मंत्री महेश जोशी भी करीब साल भर पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजे गए थे.
कई हफ्तों से तलाश रही थी पुलिस
जानकारी के मुताबिक, ACB की टीम पिछले कई हफ्तों से सुबोध अग्रवाल की तलाश में जुटी हुई थी. उनके खिलाफ पहले ही गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका था और लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया था. लगातार लोकेशन बदलते हुए वह जांच एजेंसियों से बचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन आखिरकार टीम ने उन्हें दिल्ली से दबोच लिया.
क्या है जल जीवन मिशन घोटाला?
दरअसल केंद्र सरकार की इस योजना का मकसद हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है. इसके तहत पाइपलाइन बिछाने और जल आपूर्ति से जुड़े बड़े-बड़े टेंडर जारी किए जाते हैं. आरोप है कि इसी प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार कर कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया. फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और दस्तावेजों के जरिए ठेके हासिल किए गए और प्रोजेक्ट की लागत भी तय मानकों से कहीं ज्यादा बढ़ाई गई.
जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे खेल में अधिकारियों और निजी कंपनियों के बीच मिलीभगत थी. शुरुआती जांच में करीब 960 करोड़ रुपये के टेंडरों में गड़बड़ी की बात सामने आई है, जबकि पूरे घोटाले का दायरा इससे कहीं ज्यादा बड़ा बताया जा रहा है. अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने मनमाने तरीके से चहेतों को टेंडर दिए थे.
मामले में अब तक कई लोग गिरफ्तार
इस मामले में अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और कुछ आरोपी अभी भी जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर हैं. सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि जांच में और बड़े खुलासे हो सकते हैं और इस घोटाले की जड़ तक पहुंचा जा सकेगा. एंटी करप्शन ब्यूरो गिरफ्तार सुबोध अग्रवाल को शुक्रवार (9 अप्रैल) को कोर्ट में पेश करेगी. ACB की तरफ से उनकी कस्टडी डिमांड भी मांगी जाएगी.



















