जोधपुर में फोन पर खुद को पुलिस और CBI अफसर बताकर लोगों को डराना, ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ का खौफ दिखाना और फिर रुपए ट्रांसफर करवाना वाला गिरोह गिरफ्तार हो गया है. राजस्थान में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों पर अब अदालत ने भी बेहद सख्त रुख दिखाया है.
राजस्थान हाइकोर्ट ने साफ कहा है कि साइबर ठगी जैसे अपराध सिर्फ दो लोगों का निजी विवाद नहीं हैं कि, बाद में समझौता हो जाए और मामला खत्म कर दिया जाए. अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे अपराध पूरे समाज और डिजिटल व्यवस्था को प्रभावित करते हैं, इसलिए केवल समझौते के आधार पर एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती.
‘समझौता हुआ है, केस खत्म कर दीजिए’
दरअसल, मामला जोधपुर के साइबर पुलिस थाने में दर्ज एक साइबर ठगी केस से जुड़ा है. आरोप है कि कुछ लोगों ने खुद को पुलिस और CBI अधिकारी बताकर सुरेंद्र भंडारी नाम के व्यक्ति को डराया-धमकाया और उनसे रुपए ट्रांसफर करवा लिए.
बाद में आरोपियों और शिकायतकर्ता के बीच समझौता हो गया. इसके बाद पांचों आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाकर कहा कि अब शिकायतकर्ता केस आगे नहीं चलाना चाहता, इसलिए एफआईआर रद्द कर दी जाए. लेकिन अदालत इस दलील से सहमत नहीं हुई.
‘ डिजिटल ठगी सिर्फ निजी विवाद नहीं’- कोर्ट
जस्टिस बलजिंदर सिंह की एकलपीठ ने कहा कि साइबर अपराध आज के समय में बेहद गंभीर खतरा बन चुके हैं. अगर ऐसे मामलों में केवल समझौते के आधार पर कार्रवाई खत्म की जाने लगी, तो साइबर अपराध रोकने के प्रयास कमजोर पड़ जाएंगे. कोर्ट ने माना कि डिजिटल ठगी का असर सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता. इससे ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर आम लोगों का भरोसा कमजोर होता है.
‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर इसी तरह की ठगी
मामले में सामने आया कि आरोपी फोन और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से लोगों को कॉल करते थे. वे खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर कहते थे कि उनके खिलाफ गंभीर केस दर्ज है. फिर गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करवाए जाते थे. देशभर में इन दिनों ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर इसी तरह की ठगी तेजी से बढ़ रही है. साइबर अपराधी वीडियो कॉल, फर्जी आईडी और नकली नोटिस तक इस्तेमाल कर रहे हैं.
आरोपियों पर इन-इन धाराओं में केश दर्ज
आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 384, 419, 420 और 120-बी के साथ Information Technology Act, 2000 की धारा 66-सी और 66-डी के तहत मामला दर्ज है. मामले में जोधपुर और भीलवाड़ा के पांच लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें मोहम्मद राहिल बेलिम, मोहम्मद यासीन, जीशान शेख, राशिद उर्फ राशिद आलम और यूनुस खान उर्फ लक्की उर्फ हैकर शामिल बताए गए हैं.
आमतौर पर निजी विवादों में समझौते के बाद हाईकोर्ट एफआईआर रद्द कर देता है. लेकिन इस फैसले ने साफ संकेत दिया है कि साइबर ठगी को अदालत ‘समाज के खिलाफ अपराध’ मान रही है.
यानी अब ‘पहले ठगी करो, फिर समझौता कर मामला खत्म करा लो’ वाला रास्ता आसान नहीं रहेगा.
कोटा पुलिस ने भी तीन अपराधी किए थे गिरफ्तार
बता दे कि राजस्थान सहित देश भर में डिजिटल अरेस्ट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं वहीं कुछ ही दिनों पहले कोटा पुलिस ने जोधपुर से तीन साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है करोड़ों रुपए की ठगी की गई थी लोगों के द्वारा सूत्रों के अनुसार मिली जानकारी में सामने आया है कि पूरे साइबर ठगी के बारे में कई बड़े लोग शामिल हो सकते हैं जो साइबर ठगी के द्वारा लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाते हैं. लोगों की विदेश तक भी तार जुड़े हो सकते है.



















