नई दिल्ली:

नागरिक ध्यान दें कि 20 मई को  केमिस्ट, फार्मासिस्ट और दवा वितरकों का प्रतिनिधित्व करने वाले ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने देशभर में हड़ताल का ऐलान किया है. इस हड़ताल से देश के कई हिस्सों में दवाओं की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. संस्था का कहना है कि यह विरोध ई-फार्मेसी और इंस्टेंट मेडिसिन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के लिए बने नियमों में मौजूद खामियों की तरफ केंद्र सरकार का ध्यान खींचने के लिए किया जा रहा है. एआईओसीडी का दावा है कि इन कमियों की वजह से ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां पर्याप्त निगरानी के बिना काम कर रही हैं. जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में करीब 15000 और देशभर में करीब 7-8 लाख मेडिकल स्टोर हैं, जो बंद रह सकते हैं

AIOCD क्यों विरोध कर रहा?

संस्था का आक्रोश मुख्यता दो नोटिफिकेशन- जीएसआर 220(ई) और जीएसआर 817(ई)  को लेकर है. उनका कहना है कि सरकार को दोनों नोटिफिकेशन को तत्काल प्रभान से वापस लेना चाहिए. क्योंकि इन प्रावधानों की वजह से ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां एक तरह के “कानूनी धुंधले क्षेत्र” में काम कर रही हैं. यानी इनके लिए ऐसा स्पष्ट और व्यापक कानून नहीं है, जो यह तय करे कि प्रिस्क्रिप्शन की जांच कैसे होगी, दवाइयां किस नियम के तहत दी जाएंगी और नियम उल्लंघन पर कैसे जवाबदेही तय होगी.

एआईओसीडी के महासचिव राजीव सिंघल ने बताया कि ई-फार्मेसी और इंस्टेंट डिलीवरी ऐप्स गलत या फर्जी प्रिस्क्रिप्शन पर भी दवाइयां दे रहे हैं. उनका कहना है कि ऑनलाइन फार्मेसी को भी पारंपरिक मेडिकल स्टोर की तरह सख्त नियमों के तहत संचालित किया जाना चाहिए.

जीएसआर 817(ई) पर विवाद क्यों है?

यह ड्राफ्ट नोटिफिकेशन अगस्त 2018 में जारी किया गया था. इसका उद्देश्य भारत में ई-फार्मेसी के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करना था. इसमें प्रस्ताव था कि ऑनलाइन फार्मेसी का रजिस्ट्रेशन हो, प्रिस्क्रिप्शन वेरिफिकेशन के नियम तय किए जाएं साथ ही संचालन के सुरक्षा मानक बनें और नियम तोड़ने पर कार्रवाई की व्यवस्था बनें. लेकिन यह ड्राफ्ट आज तक पूरी तरह से लागू भी नहीं हुआ और न ही वापस लिया गया. संस्था का कहना है कि इसी वजह से ई-फार्मेसी बिना स्पष्ट कानूनी ढांचे के काम कर रही हैं.

जीएसआर 220(ई) वापस लेने की मांग क्यों उठी?

यह कोविड-19 महामारी के दौरान लाया गया नोटिफिकेशन है. इसका उद्देश्य रजिस्टर्ड मेडिकल स्टोर को लोगों के घर तक दवाइयां पहुंचाने की अनुमति देना था. एआईओसीडी का मानना है कि महामारी के समय यह जरूरी कदम था, लेकिन अब ई-फार्मेसी कंपनियां इसी नोटिफिकेशन का इस्तेमाल ऑनलाइन दवा बिक्री जारी रखने के लिए कर रही हैं, जबकि इसके लिए अलग और स्पष्ट कानून नहीं है. संस्था की मांग है कि यह अस्थायी कोविड व्यवस्था अब वापस ली जाए और ई-फार्मेसी के लिए नया और स्पष्ट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाया जाए.

एआईओसीडी के महासचिव राजीव सिंघल ने कहा कि हमने एक महीने पहले ही सरकार को अपने विरोध प्रदर्शन की सूचना दी थी. हमारी यही मांग है कि दोनों नोटिफिकेशन को वापस लिया जाए. उन्होंने कहा कि पिछले महीने केमिस्ट संगठन के प्रतिनिधियों ने ड्रग कंट्रोलर जनरल आफ इंडिया (DCGI) से मुलाकात की थी. लेकिन वहां हमें सिर्फ यह आश्वासन मिला कि मामले की समीक्षा की जाएगी. सिंघल ने कहा कि कई वर्षों से सिर्फ चर्चा हो रही है लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई. हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मामला अभी विचाराधीन है.

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