चेन्नई : तमिलनाडु में प्रसिद्ध तमिल कवि-दार्शनिक तिरुवल्लुवर के चित्रण को लेकर एक नया राजनीतिक और सांस्कृतिक विवाद खड़ा हो गया है। यह विवाद चेन्नई के गिंडी स्थित तमिलनाडु लोक भवन में तिरुवल्लुवर दिवस समारोह के दौरान उन्हें भगवा वस्त्रों में चित्रित करते हुए दर्शाने वाले एक चित्र के प्रदर्शन के बाद उत्पन्न हुआ है। तिरुवल्लुवर को भगवा वस्त्र पहने, गले में रुद्राक्ष की माला और माथे पर पवित्र राख लगाए हुए दर्शाने वाला यह चित्र शनिवार को चेन्नई के लोक भवन स्थित भरथियार मंडपम में तिरुवल्लुवर तिरुनाल कजगम द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदर्शित किया गया था। इस चित्र की कुछ राजनीतिक नेताओं, विद्वानों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं ने आलोचना की और तर्क दिया कि यह कवि को एक विशिष्ट धार्मिक पहचान से जोड़ने का प्रयास है।

तमिलनाडु के मंत्री अरुण राज ने इस चित्रण की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि तिरुवल्लुवर की शिक्षाएं धर्म, जाति, नस्ल और राष्ट्रीय सीमाओं से परे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में मंत्री ने कहा कि तिरुक्कुरल के रचयिता सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्हें किसी संकीर्ण वैचारिक या धार्मिक ढांचे में सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

क्या बोले मंत्री अरुण राज

अरुण राज ने कहा कि लोक भवन या किसी भी सरकारी या सार्वजनिक संस्थान में तिरुवल्लुवर को भगवा वस्त्रों में चित्रित करना अनुचित है। तिरुवल्लुवर समस्त मानवता के हैं। उनका तिरुक्कुरल सार्वभौमिक नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों की बात करता है जो मानव जीवन का मार्गदर्शन करते हैं, न कि किसी एक धर्म के सिद्धांतों की। उन्होंने बताया कि ईश्वर का उल्लेख करते हुए कहा, तिरुवल्लुवर ने जानबूझकर ‘आदि भगवान,’ ‘मलर्मिसै एगिनन,’ और ‘अरवझी अंथानन’ जैसे समावेशी भावों का प्रयोग किया, बिना किसी विशेष देवता या धर्म का उल्लेख किए।

कवि की छवि का दुरुपयोग करने का आरोप

मंत्री के अनुसार, यह कवि के उस इरादे को दर्शाता है जिसके तहत वे नैतिक सत्यों का संचार करना चाहते थे, जिन्हें सभी पृष्ठभूमि के लोग अपना सकें। अरुणराज ने आगे तर्क दिया कि तिरुवल्लुवर को किसी विशेष धर्म से जुड़े रंग से जोड़ना कवि के सार्वभौमिक दर्शन की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि तिरुवल्लुवर को एक रंग में बांधने का प्रयास समुद्र को बर्तन में बंद करने जैसा है। उन्होंने कुछ समूहों पर कवि की छवि का दुरुपयोग करके राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया।

लोकभवन में आयोजित हुआ था कार्यक्रम

यह विवाद शनिवार को लोक भवन के भरथियार मंडपम में आयोजित तिरुवल्लुवर तिरुनाल विझा (वैकासी अनुषम वल्लुवर तिरुनाल) के संदर्भ में सामने आया है। तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. अर्लेकर ने समारोह की अध्यक्षता की और तिरुवल्लुवर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए तिरुक्कुरल को सद्गुण, नैतिक शासन, सामाजिक सद्भाव और नैतिक उत्तरदायित्व का कालातीत मार्गदर्शक बताया।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि तिरुवल्लुवर की शिक्षाएं विभिन्न संस्कृतियों और पीढ़ियों के लोगों को प्रेरित करती रहती हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे इस उत्कृष्ट ग्रंथ में निहित सत्यनिष्ठा, करुणा और ज्ञान के मूल्यों को आत्मसात करें।

विजय मंत्रिमंडल का कोई भी नहीं हुआ शामिल
महत्वपूर्ण बात यह है कि मुख्यमंत्री विजय के मंत्रिमंडल का कोई भी मंत्री लोक भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हुआ, जिससे समारोह और कवि के चित्रण को लेकर चल रहे विवाद को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और भी तेज हो गई हैं।

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