हिंदू धर्म में पौष के महीने का विशेष महत्व माना गया है. पौष के महीने में सूर्य देव की पूजा की जाती है. जिस कारण पौष के महीने का धार्मिक महत्व बढ़ जाता है. पौष मास में ही मकर संक्रांति का पर्व आता है. सूर्य देव जब मकर राशि में आते हैं तो इसे मकर संक्रांति कहा जाता है. पौष का महीने में जबरदस्त सर्दी रहती है. तापमान गिर जाता है. पंचांग की गणना के अनुसार पौष मास का आरंभ 31 दिसंबर हुआ था. अब इस मास का समापन होने जा रहा है. 28 जनवरी 2021 को पौष का समापन होगा.
सूर्य उपासना का महीना
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पौष के महीने में सूर्य देव की पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं. जिन लोगों की जन्म कुंडली में सूर्य अशुभ या कमजोर हैं उन्हें पौष मास में सूर्य भगवान की विशेष पूजा करनी चाहिए.
सूर्य पूजा का लाभ
सूर्य देव की पूजा करने से जीवन में मान सम्मान की प्राप्ति होती है. सूर्य जब कमजोर होते हैं तो व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सूर्य कमजोर होने से लोकप्रियता में कमी आने लगती हैं, बॉस से संबंध ठीक नहीं रहते हैं. आंख से जुड़ी परेशानी हो सकती है. पिता से भी संबंध कमजोर होते हैं. इतना ही नहीं जिन लोगों को प्रमोशन या उच्च पद मिलने में दिक्कत आती है उसके पीछे भी कहीं न कहीं कमजोर सूर्य का ही हाथ होता है.
पौष मास में ऐसे करें सूर्य पूजा
पौष के महीने में सूर्य को जल देने से शुभ फल प्राप्त होते हैं. नियमित सूर्य देव को जल देने से तेज में वृद्धि होती है. जल में यदि लाल चंदन मिलाकर अघ्र्य दिया जाए तो इसके फल भी अच्छे मिलते हैं.
इस मंत्र का जाप करें
सूर्य देव को अघ्र्य देते समय ऊँ आदित्याय नम: का जाप करना चाहिए. साथ अघ्र्य देते समय जल की धारा से सूर्य को देखना चाहिए.
नमक का सेवन कम करें
पौष के महीने में नमक का सेवन कम करना चाहिए, अधिक नमक का सेवन करने से सूर्य कमजोर होते हैं.

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