लाखों भारतीयों के लिए अमेरिका का ‘ग्रीन कार्ड’ पाना एक हसीन सपने के सच होने जैसा होता है. लोग इसके लिए अपनी पूरी जिंदगी खपा देते हैं. लेकिन न्यूट्रिशनिस्ट और आंत्रप्रेन्योर भारती रमेश की कहानी बिल्कुल उलटी है. जिस ग्रीन कार्ड को पाने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया, जब वो मिला, तो उन्होंने उसे छोड़ भारत लौटने का फैसला कर लिया. वो भी सिर्फ इसलिए ताकि अपनी मातृभूमि में आकर बिल्कुल शून्य से अपना खुद का स्टार्टअप खड़ा कर सकें.
भारती ने सोशल मीडिया पर अपनी इस अनोखी और भावुक कर देने वाली यात्रा को साझा किया है. आपको जानकर हैरानी होगी कि भारती को कोई मामूली ग्रीन कार्ड नहीं, बल्कि असाधारण प्रतिभा वाले लोगों को मिलने वाला खास ‘EB-1A’ ग्रीन कार्ड मिला था.
जिंदगी में आया नया मोड़
भारती साल 2020 में मास्टर्स की पढ़ाई करने अमेरिका गई थीं. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वीजा की झंझटों से बचने के लिए ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया शुरू की, ताकि वो खुलकर अपने स्टार्टअप पर काम कर सकें. लेकिन जब वो अपनी जिंदगी की इस सबसे बड़ी उड़ान के लिए तैयार थीं, तभी जिंदगी ने नया मोड़ लिया.
भारती ने बेहद भावुक होकर लिखा, “मैंने अपने माता-पिता में से एक को खो दिया.” इस गहरे सदमे ने उनकी जिंदगी के मायने ही बदल दिए. बाहर से भले ही उनकी जिंदगी बेहद चकाचौंध और कामयाबी से भरी दिख रही थी, लेकिन अंदर से वो बिल्कुल टूट चुकी थीं. वो कहती हैं, “मैं सिर्फ भारी-भरकम किराया चुकाने और हेल्थ इंश्योरेंस के लिए दिन-रात नौकरी कर रही थी, जबकि मेरा दिल अपने स्टार्टअप के लिए धड़क रहा था.”
लगातार भागती जिंदगी और खुद को साबित करने की अंधी दौड़ ने आखिरकार उन्हें मानसिक रूप से थका दिया. वह पूरी तरह बिखर गईं. खुद को दोबारा संभालने में उन्हें आठ महीने का लंबा वक्त लगा.
ऐसे बनाया भारत को अलविदा कहने का प्लान
तभी उन्होंने और उनके पति ने एक बड़ा और साहसी फैसला लिया. उन्होंने तय किया कि वे अमेरिका की इस आपाधापी वाली जिंदगी को हमेशा के लिए अलविदा कहेंगे और भारत लौटेंगे. भारत आकर भारती ने आखिरकार अपनी नई पहचान हासिल की और आज वह गर्व से खुद को एक ‘स्टार्टअप फाउंडर’ कहती हैं.
सोशल मीडिया पर भारती के इस फैसले की जमकर तारीफ हो रही है. लोग कह रहे हैं कि अपनी मिट्टी से जुड़कर कुछ नया करने का उनका यह जज्बा वाकई काबिले-तारीफ है.



















