राजधानी दिल्ली स्थित ऐतिहासिक जंतर-मंतर का नाम सुनते ही आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और बैरिकेड्स के साथ सुरक्षा-बलों की तैनाती की तस्वीर हमारे जेहन में तैर जाती है. लेकिन करीब साढ़े तीन दशक से इन्हीं पहचानों के साथ जुड़े रहे जंतर-मंतर की तस्वीर अब बदल गई है. लगभग 33 वर्षों के बाद जंतर-मंतर रोड से सुरक्षा बैरिकेडिंग हटा दी गई है और सड़क को आम यातायात के लिए खोल दिया गया है.
इससे न सिर्फ आम लोगों को आवाजाही की सुविधा मिलेगी, बल्कि कनॉट प्लेस, संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में रोजाना लगने वाले ट्रैफिक दबाव से भी राहत मिलने की उम्मीद है.
सुरक्षा के घेरे में रहता था पूरा इलाका
जंतर-मंतर रोड पर पहले सुरक्षा के कई स्तर बनाए गए थे. सड़क के दोनों तरफ मजबूत बैरिकेड्स लगाए जाते थे. इसके अलावा दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ पैरामिलिट्री फोर्स, क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) और दंगा नियंत्रण वाहन भी तैनात रहते थे. इन इंतजामों के चलते लंबे समय से यहां से आम वाहनों की आवाजाही प्रभावित थी. सड़क बंद होने का सीधा असर आसपास के रास्तों पर पड़ता था. अब बैरिकेडिंग हटने के बाद वाहन चालकों को इस इलाके से गुजरने के लिए वैकल्पिक रास्तों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
जंतर-मंतर को धरना स्थल की सूची से हटाने की क्या वजह?
जंतर-मंतर को आधिकारिक धरना स्थलों की सूची से हटाने के पीछे अक्टूबर में हुई घटनाओं की अहम भूमिका रही. दरअसल, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और दूसरे संगठनों ने प्रदर्शन किया था. इस दौरान दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी.
इसके बाद गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर को आदेश जारी किया. इस आदेश में जंतर-मंतर को आधिकारिक धरना स्थलों की सूची से बाहर कर दिया गया. इसके बाद यहां पहले की तरह विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की व्यवस्था में बदलाव आया.
कनॉट प्लेस और संसद मार्ग जाने वालों का सफर होगा आसान
जंतर-मंतर रोड बंद रहने का असर सिर्फ इसी इलाके तक सीमित नहीं था. इसका दबाव संसद मार्ग, कनॉट प्लेस के आउटर और इनर सर्कल, अशोक रोड और टॉल्स्टॉय मार्ग तक पहुंचता था. खासकर पीक आवर्स में स्थिति मुश्किल हो जाती थी. चंद मिनटों में पूरा होने वाला सफर कई बार 20 से 30 मिनट तक खिंच जाता था. नौकरीपेशा लोगों और रोजाना इस रूट से गुजरने वाले वाहन चालकों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता था. अब सड़क खुलने से कनॉट प्लेस और आसपास के दफ्तरों तक पहुंचना पहले के मुकाबले आसान हो सकता है.
जंतर-मंतर रोड के चालू होने से इन प्रमुख सड़कों के बीच सीधा संपर्क भी बहाल हो गया है. बैरिकेड्स हटाए जाने के बाद यातायात को व्यवस्थित रखने के लिए ट्रैफिक अधिकारियों की ओर से जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि वाहनों की आवाजाही सुचारु बनायी रखी जा सके.



















