हरिद्वार: साल 2026 शुरू होते ही धर्मनगरी हरिद्वार में अर्धकुंभ शुरू हो जाएगा. अर्धकुंभ के लिए करीब 700 करोड़ से अधिक का बजट आ चुका है, जिससे सड़कें, नए भवन और सौंदर्यीकरण का काम काफी तेजी पर है. लेकिन हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र का राजकीय महाविद्यालय साल 2021 में स्थापित होने के बावजूद आज 2026 तक अपने स्थाई भवन को तरस रहा है.
वर्तमान में यह कॉलेज भीमगोड़ा क्षेत्र में भूमानंद आश्रम में संचालित हो रहा है. इस महाविद्यालय में करीब 300-350 छात्र-छात्राएं टपकती टिन शेड के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं. इस महाविद्यालय में ना ढंग के कमरे हैं, ना लैब, ना लाइब्रेरी और ना ही छात्राओं के लिए साफ शौचालय है. ऊपर से बंदर-लंगूरों का खौफ बना रहता है.
कुंभ के लिए करोड़ों, कॉलेज के लिए एक भवन क्यों नहीं?
उन्होंने बताया कि कॉलेज में केवल स्नातक तक की पढ़ाई होने से आगे पीजी करने वाले छात्रों का भविष्य अधर में है. छात्र-छात्राओं का साफ कहना है कि जब कुंभ में करोड़ों खर्च हो रहे हैं, तो कॉलेज के लिए एक भवन क्यों नहीं? इस मामले को लेकर जब लोकल 18 की टीम ने महाविद्यालय की छात्रा मुस्कान से बातचीत की तो छात्रा ने अपनी समस्याएं साझा करते हुए बताया कि पिछले साल ज्ञापन देने के बाद भी कॉलेज को अपनी जमीन नहीं मिली है. कॉलेज का अपना भवन नहीं होने से 300 से अधिक छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकार में है और सभी विद्यार्थी टिन शेड के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं.
छात्रा मुस्कान ने कहा कि कुंभ के लिए करीब 700 करोड़ का बजट आया है, लेकिन 5-6 सालों से चल रहे इस कॉलेज के लिए कुछ नहीं आया है. आश्रम परिसर में बंदर-लंगूरों का इतना आतंक है कि वे खाने-पीने की चीजों पर झपटते हैं और शिक्षकों के बाल तक खींच चुके हैं. महाविद्यालय में शौचालय के हालत बेहद ही खस्ता हाल हैं और जगह की भारी कमी के चलते बच्चे कक्षाओं में नहीं आ पाते, जिससे शिक्षक भी परेशान हैं.
आश्रम के सहारे चल रहा कॉलेज
राजकीय महाविद्यालय भूपतवाला के छात्रसंघ अध्यक्ष सन्नी शर्मा बताते हैं कि उनका कॉलेज एक आश्रम के सहारे चल रहा है. पिछले साल इसी समस्या को लेकर सौंपा गया ज्ञापन आज भी धूल फांक रहा है और उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई. साल 2021 में कॉलेज की स्थापना के बाद से अब तक कॉलेज को अपनी जमीन नहीं मिल सकी है, जिससे छात्रों का भविष्य अंधकार में है.
आश्रम परिसर में मात्र 4-5 कमरे हैं जहां शिक्षक काम करते हैं और वहीं बच्चों को भी बैठना पड़ता है. छात्र संघ अध्यक्ष सन्नी शर्मा ने आगे बताया कि बारिश होने पर छत से पानी टपकता है और पूरी क्लास बारिश के पानी से भीग जाती है जिससे पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाती है. वहीं टीन शेड में बैठने पर बंदरों के लंगूर हमलों का डर बना रहता है.



















