चंद्रमा को मन का कारक माना गया है. चंद्रमा को कर्क राशि का स्वामी माना गया है. चंद्रमा को ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कर्क राशि जन्म कुंडली का चौथा स्थान है जो सुख के साथ माता का भी कारक माना गया है. चंद्रमा जब अशुभ होता है तो मां को कष्ट देता है और व्यक्ति के सुखों को प्रभावित करने लगता है. इसके साथ अशुभ होने पर चंद्रमा कफ और सांस से जुड़ी दिक्कतें भी प्रदान करते हैं. सर्दी जुकाम और न्यूमोनिया आदि रोग होने की संभावना बनी रहती है. चंद्रमा जब कुंडली में शुभ होता है तो व्यक्ति को कल्पनाशक्ति से पूर्ण बनाता है. ऐसे लोग कला और साहित्य के क्षेत्र में बहुत सफलता प्राप्त करते हैं. चंद्रमा को पश्चिम दिशा का स्वामी माना गया है. कर्क राशि में चंद्रमा को उच्च और वृश्चिक राशि में इसे नीच का माना गया है. चंद्रमा जब अशुभ होता है तो व्यक्ति को मानसिक तनाव भी प्रदान करता है. सिरदर्द की समस्या बनी रहती है जिस कारण व्यक्ति की कार्य क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और जॉब और बिजनेस में परेशानी आना आरंभ हो जाती हैं. कभी कभी मन में नकारात्मक विचार भी आने लगते हैं.चंद्रमा का स्वभाव चंचल माना गया है. शुभ होने पर चंद्रमा व्यक्ति को मित्रों के बीच रहने वाला बनाता है. ऐसे लोग बहुत ही भावुक होते हैं, जिस कारण ये छोटी छोटी समस्याओं पर विचलित हो जाते हैं. चंद्रमा को शुभ बनाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. चंद्रमा को शुभ बनाने के लिए सोमवार को भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए. शिव पूजा से चंद्रमा का दोष दूर होता है. वहीं पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को जल अर्पित करना चाहिए. मां की सेवा करनी चाहिए इससे भी चंद्रमा की अशुभता दूर होती है. सफेद वस्तुओं का भी दान कर सकते हैं. गलत लोगों के प्रभाव में आने से बचना चाहिए. मित्रता करते समय सावधानी बरतनी चाहिए.

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