नई दिल्ली। पूरे देश में कहर बरपा रहे कोरोना वायरस के चलते लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन का असर वैसे तो सभी वर्गों पर पड़ा है। लेकिन एक ताजा सर्वे से खुलासा हुआ है कि लॉकडाउन का सबसे बुरा असर देश के मध्यम वर्ग पर हुआ है। इस दौरान देश के मध्यम वर्ग को इनकम में 15 फीसदी का नुकसान हुआ है, जो इस वर्ग के लिए काफी मायने रखता है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनोमी (सीएमआईई) के एक ताजा सर्वे से पता चला है कि अप्रैल-जून 2020 के दौरान देश में मध्यम और उच्च मध्यम वर्ग को कमाई में ग्रोथ के मामले में कहीं अधिक नुकसान हुआ है। सर्वे में सीएमआईई ने लोगों की बीते साल कमाई में हुई बढ़ोत्तरी और इस साल कमाई में हुई बढ़ोत्तरी के अनुपात का अध्ययन किया। सीएमआईई सर्वे के अनुसार देश में जिन लोगों की मासिक कमाई 40,000 रुपये से कम थी, कोरोना संकट में लॉकडाउन के दौरान उनकी कमाई में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। वहीं, जिन लोगों की कमाई 60 हजार रुपये प्रति माह थी, उनकी कमाई में एक फीसदी की मामूली बढ़ोतरी हुई है, जबकि पिछले साल यह बढ़ोतरी 14 फीसदी थी। सीएमआईई सर्वे के अनुसार, लॉकडाउन के दौरान ईपीएफओ के करीब 13 फीसदी खाताधारकों ने अपना पैसा निकाला है। वहीं, सर्वे के अनुसार, 5 लाख रुपए सालाना या इससे अधिक कमाई वाले आधे से ज्यादा लोगों की कमाई में 2019 के अप्रैल-जून में बढ़ोत्तरी हुई थी। लेकिन इस साल इसमें 15 फीसदी की गिरावट आई है। जबकि, 10 लाख या उससे ज्यादा सालाना कमाने वालों की कमाई में और भारी गिरावट देखी गई है। वहीं सालाना 18 से 24 लाख रुपए इनकम वालों की कमाई में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई, जो जबरदस्त गिरावट है, क्योंकि साल 2019 में इस वर्ग की कमाई में 65 फीसदी से ज्यादा की वृद्धि हुई थी।हालांकि, सर्वे में दिलचस्प बात ये सामने आई है कि सालाना 36 लाख रुपए से ज्यादा कमाई वाले यानी भारत के उच्च वर्ग की कमाई लॉकडाउन के दौरान बढ़ी है। हालांकि, दूसरी तरह से देखा जाए तो लॉकडाउन का असर इन पर भी पड़ा है। (एजेंसी)

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