रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कोरोना महामारी के संक्रमण काल में वित्तीय मितव्यता एवं अनुशासन के नाम पर राज्य के कर्मचारियों-अधिकारियों के वार्षिक वेतनवृद्धि (इंक्रीमेंट), महंगाई भत्ता, सातवे वेतनमान का एरियर, तृतीय श्रेणी के पदों पर अनुकंपा नियुक्ति में रोक लगाकर कर्मचारियों की उपेक्षा की जा रही है। जिसको लेकर 1 नवम्बर, 2020 राजधानी रायपुर में सत्याग्रह 2 एवं 3 नवम्बर 2020 समस्त कर्मचारी-अधिकारी सामूहिक अवकाश लेकर 3 नवम्बर को जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन एवं कलेक्टर को ज्ञापन सौपेंगे। प्रदेश अधिकारी-कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष करन सिंह अटेरिया ने कहा कि वित्तीय संकट के दौर में माननीय वर्तमान एवं पूर्व विधायकों के भत्ते एवं पैंशन में वृद्धि, संसदीय सचिवों की नियुक्ति, निगम, मण्डल एवं प्राधिकरण के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्तियां, नया रायपुर में नई विधानसभा, मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, विश्राम गृह सहित सचिवों के बंगलों का निर्माण कार्य को प्राथमिकता देकर अपनी जान जोखिम में डालकर कोविड -19 में ड्यूटी दे रहे कर्मचारियों, अधिकारियों के 50 लाख रूपये का बीमा करने, कर्मचारियों, अधिकारियों के वार्षिक वेतनवृद्धि (इंक्रीमेंट), मंहगाई भत्ता, सातवें वेतनमान का एरियर, कर्मचारियों की वेतन विसंगति, संविदा, दैनिक वेतन एवं आउटसोर्सिंग से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने तथा तृतीय श्रेणी के पदों पर अनुकंपा नियुक्ति देने के लिये सरकार के पास पैसा नहीं है। आप सभी से विनम्र अनुरोध है कि आपकी अपनी ग्यारह सूत्रीय मांगों के ध्यानाकर्षण हेतु अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के कार्यक्रम को समर्थन एवं सहयोग प्रदान कर कार्यक्रम को सफल बनाईये।
कोरोना काल में वित्तीय मितव्यता एवं अनुशासन के नाम पर अधिकारियों-कर्मचारियों की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं-अटेरिया
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