देश में एक ओर जहां तरह-तरह के नशों का सेवन बढ़ रहा है, वहीं नशा छुड़ाने के नाम पर खोले गए अवैध नशा मुक्ति केंद्रों में न सिर्फ नशेडिय़ों का उत्पीडऩ तथा उन्हें मौत के मुंह में धकेला जा रहा है, बल्कि भारी-भरकम फीस वसूल कर उनके परिजनों को लूटा भी जा रहा है। इसकी पिछले 4 महीनों में सामने आई चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :

* 12 अगस्त, 2025 को ‘ग्वालियर’ (मध्य प्रदेश) स्थित ‘मिनी गोल्डन संस्कार नशा मुक्ति केंद्र’ में नशे की लत छुड़ाने के लिए भर्ती करवाए गए एक बैंक कर्मचारी ‘पंकज शर्मा’ की मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि ‘पंकज शर्मा’ के सिर पर गहरे घाव के अलावा शरीर के अन्य अंगों पर कुल 16 घाव थे तथा उसकी पसलियां भी टूटी हुई थीं। 

* 20 अगस्त को ‘नोएडा’ (उत्तर प्रदेश) स्थित ‘अटल फाऊंडेशन’ नामक नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती युवक ‘पिंटू’ की मृत्यु हो गई। मृतक के परिजनों का आरोप है कि ‘पिंटू’ की मौत नशा मुक्ति केंद्र के स्टाफ द्वारा मारपीट के कारण हुई और उसके शरीर पर चोट के नीले निशान भी पाए गए। 
* 22 अगस्त को ‘ग्वालियर’ (मध्य प्रदेश) में नशे की लत से मुक्ति के लिए ‘मंथन नशामुक्ति केंद्र’ में भर्ती करवाए गए पुलिस के एक जवान ‘अजय भदौरिया’ की इलाज के नाम पर पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। 
* 1 नवम्बर, 2025 को ‘बिजनौर’ (उत्तर प्रदेश) स्थित ‘जीवन रक्षक नशा मुक्ति आश्रम में ‘सत्येंद्र’ नामक युवक की मौत के मामले में मृतक के पिता की शिकायत पर पुलिस ने इसके संचालक व स्टाफ के विरुद्ध केस दर्ज किया।
* 17 नवम्बर, 2025 को ‘शिमला’ (हिमाचल) के नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती एक पूर्व सैनिक की मृत्यु हो गई। इस बारे पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों ने मृतक से मारपीट करने की बात स्वीकार की।
* 19 नवम्बर को ‘सादुल शहर’ (राजस्थान) में बिना लाइसैंस चलाए जा रहे 3 नशा मुक्ति केंद्रों का भंडाफोड़ किया गया जहां उपचाराधीन 120 से अधिक नशा पीड़ित अत्यंत दयनीय हालत में पड़े मिले। 
इन केंद्रों में भर्ती नशेडिय़ों ने बताया कि इनके संचालक उनके साथ मारपीट करते हैं, परिजनों से मिलने नहीं देते और न ही फोन पर उनके घर वालों से बात करवाते हैं। इसके लिए अनुरोध करने पर उन्हें तरह-तरह की यातनाएं दी जाती हैं और उन्हें भोजन देना भी बंद कर दिया जाता है। 

* 20 दिसम्बर को ‘उज्जैन’ (मध्य प्रदेश) स्थित अवैध रूप से चलाए जा रहे ‘नव मानस नशा मुक्ति केंद्र’ में ‘हरीश निर्मल’ नामक नशेड़ी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि उसकी मौत पिटाई के कारण लिवर फटने से हुई जिसके बाद पुलिस ने नशा मुक्ति केंद्र के 4 संचालकों को गिरफ्तार किया। 
* 25 दिसम्बर को ‘रेवाड़ी’ (हरियाणा) में स्थित एक अवैध नशा मुक्ति केंद्र में इलाज करवा रहे युवक की इस केंद्र के स्टाफ द्वारा की गई पिटाई के परिणामस्वरूप मौत हो गई। मृतक के पिता के अनुसार केंद्र के संचालक ने उससे 1000 रुपए दाखिला फीस और 8000 रुपए मासिक शुल्क की शर्त पर इलाज के लिए भर्ती किया था।  
* 29 दिसम्बर को ‘चीका’ (हरियाणा) में एक अवैध नशा मुक्ति केंद्र, जहां प्रति रोगी 10,000 से 20,000 रुपए तक फीस ली जाती थी और गलती करने पर मारपीट भी की जाती थी, से 30 से अधिक मरीजों को निकाल कर सरकारी जिला नागरिक अस्पताल में दाखिल करवाया गया। उक्त घटनाओं से स्पष्टï है कि अवैध रूप से चलाए जा रहे अधिकांश तथाकथित नशा मुक्ति केंद्रों में पीड़ितों का इलाज करने के नाम पर उनको लूटा व मानसिक और शारीरिक रूप से उनका शोषण ही किया जा रहा है। संबंधित अधिकारियों को इस बारे संज्ञान लेते हुए ऐसे अवैध नशा मुक्ति केंद्रों पर पाबंदी लगानी चाहिए और नशे की लत के शिकार युवाओं के परिजनों को इस बात के लिए प्रेरित करना चाहिए कि वे अपने रोगियों का इलाज सरकारी अस्पतालों में करवाएं।

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