कई लोगों को सोते समय खर्राटे लेने की आदत होती है. कभी-कभी इन खर्राटों की आवाज इतनी तेज होती है कि इससे अगल-बगल सोने वाले लोग भी परेशान हो जाते हैं. तेज खर्राटे कभी-कभी किसी गंभीर समस्या का भी संकेत देते हैं. आइए जानते हैं कि खर्राटे क्यों आते हैं और इन्हें आसान तरीकों से कैसे दूर किया जा सकता है.
क्यों आते हैं खर्राटे-खर्राटे लेने के दौरान एक कर्कश आवाज निकलती है. ऐसा तब होता है जब सांस लेने के दौरान हवा का बहाव गले में स्थित ऊतकों में कंपन पैदा करता है. जब आप गहरी नींद में सोते हैं तो आपके मुंह, जीभ और गले की मांसपेशियों को आराम मिलता है. इस दौरान गले के ऊतक इतने ढीले हो जाते हैं कि वो आंशिक रूप से वायुमार्ग को ब्लॉक करने लगते हैं और इसकी वजह से कंपन होने लगता है.
वायुमार्ग जितना संकुचित होता है, हवा का प्रवाह उतना तेज होता जाता है. यह ऊतक कंपन को बढ़ाता है, जिससे खर्राटे की आवाज जोर-जोर से आती है. खर्राटे आने के कई कारण हो सकते हैं जैसे कि साइनस की समस्या, शराब का ज्यादा सेवन, एलर्जी, कोल्ड या फिर मोटापा. कुछ तरीकों से खर्राटे की समस्या से छुटकारा मिल सकता है.
सोने का पोजिशन बदलें- पीठ के बल सोने पर जीभ और तालू वायुमार्ग को संकुचित करते हैं और इसकी वजह से नींद के दौरान कंपन की आवाज पैदा होती है. साइड की तरफ सोने से इसे रोकने में मदद मिलती है. शरीर के बराबर तकिए पर सोने से भी खर्राटे कम आते हैं क्योंकि ये बॉडी का बैलेंस एक तरफ बनाए रखता है. सिर ऊंचा करके सोने से भी खर्राटे कम आते हैं क्योंकि ये नाक के वायुमार्ग मार्ग को खोलता है और खर्राटों को रोकता है. हालांकि, इससे गले में दर्द की भी शिकायत हो सकती है.
वजन घटाएं- वजन घटाने से भी कुछ लोगों को खर्राटों की समस्या में मदद मिल सकती है. हालांकि, ये सब पर लागू नहीं होता है. कुछ पतले लोग भी खर्राटे लेते हैं. अगर आप पहले खर्राटे नहीं लेते थे और वजन बढऩे के बाद आपको ये दिक्कत होने लगी है तो वजन कम करने से आपको खर्राटों से छुटकारा मिल सकता है. गर्दन के आसपास चर्बी बढऩे से खर्राटे ज्यादा आते हैं.
शराब से दूर रहें-शराब गले की मांसपेशियों को संकुचित कर देता है जिसकी वजह से खर्राटे आने लगते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने से चार से पांच घंटे पहले शराब पीने से खर्राटे आने की संभावना और बढ़ जाती है. आमतौर पर जो लोग खर्राटे नहीं लेते हैं, शराब पीने के बाद वो भी खर्राटे लेने लगते हैं.
सोने की सही आदत डालें- समय पर ना सोने की वजह भी खर्राटों की समस्या को बढ़ाती है. देर तक जागने के बाद जब आप सोते हैं तो शरीर बिल्कुल थक जाता है और नींद बहुत गहरी आती है. इस अवस्था में भी मांसपेशियां संकुचित होती हैं और खर्राटे आने लगते हैं.
नासिका को खुला रखें- अगर आप नाक से खर्राटे लेते हैं तो नाक के वायुमार्ग मार्ग को खुला रखने में मदद मिल सकती है. ये वायु को धीमी गति से अंदर की तरफ खींचता है. सर्दी या किसी कारणवश नाक बंद होने पर खर्राटे ज्यादा आते हैं. सोने से पहले गर्म पानी से नहाने से नाक के छिद्र खुल जाते हैं. नमक के पानी से नाक धोने से भी खर्राटों में मदद मिलती है.
अपना तकिया बदलें- कभी-कभी तकिये की एलर्जी की वजह से भी खर्राटे आते हैं. तकिए में जमा धूल के कणों से एलर्जी हो सकती है जिसकी वजह से खर्राटे आ सकते हैं. हर दो सप्ताह में एक बार अपने तकिए को खुली हवा में रखें और हर छह महीने में अपना तकिया बदलें. इससे आपके खर्राटे की समस्या कम हो सकती है.
हाइड्रेटेड रहें- तरल पदार्थ का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें और खुद को हाइड्रेटेड रखें. डिहाइड्रेशन होने पर नाक और तालू चिपचिपे हो जाते हैं और इसकी वजह से खर्राटे ज्यादा आते हैं. इसे दूर करने के लिए खूब पानी पिएं और लिक्विड डाइट की मात्रा बढ़ाएं.

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