भोजशाला विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन इस स्तर पर हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है. मामले की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने कई अहम दलीलें पेश कीं. उन्होंने कोर्ट से मांग की कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 2 अप्रैल से शुरू होने वाली सुनवाई को टाल दिया जाए और सर्वेक्षण से जुड़ी वीडियोग्राफी तथा रंगीन तस्वीरें मस्जिद कमेटी को उपलब्ध कराई जाएं. खुर्शीद ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट पर जवाब देने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया और बिना पूरी सामग्री उपलब्ध कराए जल्दबाजी में सुनवाई की जा रही है.

CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी

इन दलीलों पर सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को भरोसा है कि हाईकोर्ट सभी आपत्तियों पर उचित तरीके से विचार करेगा. उन्होंने कहा, ‘हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि उच्च न्यायालय वीडियोग्राफी का अवलोकन करेगा और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार सभी आपत्तियों पर निर्णय लेगा.’ कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी पक्ष को कोई शिकायत है तो वह हाईकोर्ट का रुख कर सकता है.

वीडियोग्राफी और साक्ष्य पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि सर्वे रिपोर्ट में कुछ आपत्तियां सूचीबद्ध हैं, जबकि कुछ अन्य आपत्तियां शामिल नहीं हैं. ऐसे में वीडियोग्राफी अदालत में चलाई जाएगी और सभी पक्ष उसकी सत्यता पर सवाल उठा सकते हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में सभी इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्य शामिल किए जाएंगे, जिससे पारदर्शिता बनी रहे.

यह याचिका मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से दायर की गई थी, जिसमें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 16 मार्च के आदेश को चुनौती दी गई थी. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में विवादित भोजशाला स्थल के सेल्फ-इंस्पेक्शन की अनुमति दी थी. यह आदेश हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया था, जिसमें इस स्थल को देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर घोषित करने की मांग की गई है.

हिंदू पक्ष की दलील

हिंदू पक्ष की ओर से वकील विष्णु जैन ने कहा कि हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की मांग को खारिज नहीं किया है, बल्कि यह कहा है कि सभी आपत्तियों पर अंतिम सुनवाई के दौरान विचार किया जाएगा.

इस सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने उसके पूर्व आदेशों का सम्मान करते हुए अंतरिम व्यवस्था दी है और सभी आपत्तियों को रिकॉर्ड पर लिया गया है. कोर्ट ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट वीडियोग्राफी और अन्य साक्ष्यों की जांच कर सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला करेगा.

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