गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) में एक औपचारिक शिकायत दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान झूठे, मानहानिकारक और गुमराह करने वाले बयान दिए, और उसके बाद ऑनलाइन उत्पीड़न भी किया गया। शिकायतकर्ता सुजाता गुरुंग चौधरी हैं, जो गुवाहाटी की रहने वाली हैं। वह असम विधानसभा चुनाव की सबसे कम उम्र की उम्मीदवार कुंकी चौधरी (27) की मां हैं। कुंकी चौधरी ने सेंट्रल गुवाहाटी निर्वाचन क्षेत्र से AJP के टिकट पर BJP के दिग्गज नेता विजय गुप्ता के खिलाफ चुनाव लड़ा है।
कुंकी चौधरी की मां ने आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका दावा है कि चुनावी राजनीति में उनकी कोई सीधी भागीदारी न होने के बावजूद उन्हें सार्वजनिक रूप से निशाना बनाया गया। शिकायत के अनुसार, उनकी बेटी कुंकी चौधरी के गुवाहाटी सेंट्रल निर्वाचन क्षेत्र से चल रहे असम विधानसभा चुनावों में चुनाव लड़ने के कारण उन्हें इस विवाद में घसीटा गया।
सुजाता पर बीफ खाने का लगाया था आरोप
अपनी शिकायत में सुजाता चौधरी ने आरोप लगाया कि एक सार्वजनिक प्रचार अभियान के दौरान, मुख्यमंत्री ने उन पर कई आरोप लगाए। इन आरोपों में यह दावा भी शामिल था कि उनकी सोशल मीडिया गतिविधियां सार्वजनिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती हैं कि उनकी पाकिस्तान के प्रति सहानुभूति है। वे राष्ट्र-विरोधी तत्वों का समर्थन करती हैं, और उन्होंने सार्वजनिक रूप से बीफ़ (गोमांस) का सेवन किया है। सुजाता ने इन सभी आरोपों का कड़ा खंडन किया है। उन्होंने कहा कि आरोप झूठे, बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण हैं। यहा पूरी तरह से राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं।
अमेरिका के डेनवर से मंगवाया लेटर
शिकायत का एक मुख्य बिंदु एक सार्वजनिक रूप से दिखाई गई तस्वीर के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसका कथित तौर पर यह दावा करने के लिए इस्तेमाल किया गया था कि वह बीफ़ (गोमांस) खा रही थी। सुजाता चौधरी ने स्पष्ट किया कि यह तस्वीर अमेरिका के डेनवर में स्थित एक इमर्सिव म्यूज़ियम में ली गई थी, और तस्वीर में दिख रही चीज़ असल में एक ‘प्रॉप पिलो’ (सजावटी तकिया) थी, न कि कोई खाना। इस दावे की पुष्टि के लिए उन्होंने डेनवर स्थित ‘एलिवेशन मिनिस्ट्रीज़, इंक.’ का एक पत्र भी साथ में लगाया गया है, जिसमें इस बात की पुष्टि की गई है कि वह चीज़ असल में एक कलात्मक प्रॉप (सजावटी वस्तु) थी, जिसे वहां आने वाले लोगों के लिए रखा गया था।
मानसिक कष्ट और मानहानि का दावा
शिकायत में इन आरोपों के बाद पैदा हुई स्थितियों पर भी प्रकाश डाला गया है। इसमें कहा गया है कि उनकी निजी तस्वीरें उनकी बिना सहमति के सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर फैलाई गई हैं। इन तस्वीरों में उनके नाबालिग बेटे के साथ वाली तस्वीरें भी शामिल हैं। उन्होंने यह आरोप भी लगाया है कि उन्हें ऑनलाइन दुर्व्यवहार, उत्पीड़न और छेड़छाड़ की गई (मॉर्फ्ड) तथा AI-जनरेटेड सामग्री के प्रसार का सामना करना पड़ा है। उनका दावा है कि इन सब चीज़ों के कारण उन्हें खुद और उनके परिवार को गंभीर मानसिक कष्ट और मानहानि का सामना करना पड़ा है।
सुजाता चौधरी ने NCW (राष्ट्रीय महिला आयोग) से आग्रह किया है कि वे इस मामले का तत्काल संज्ञान लें, संबंधित अधिकारियों को कथित मानहानि और उत्पीड़न की जांच करने का निर्देश दें, हानिकारक ऑनलाइन सामग्री को हटवाना सुनिश्चित करें, और उचित कानूनी कार्रवाई की सिफारिश करें। उन्होंने अपनी गरिमा और अपने नाबालिग बच्चे की निजता की सुरक्षा की भी मांग की है। शिकायत की प्रतियां असम के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी भेजी गई हैं, ताकि इस मामले में आगे की कार्रवाई की जा सके।



















